“मां तू कितनी प्यारी है“

-आलोक ‘असरदार’-

poetry-smबंद किये ख्वाबों के पलके, मैं तेरे जीवन में आया

आँख खुली तो सबसे पहले माँ मैंने तुझको ही पाया

तेरे गोद में मैंने अपना बचपन हँसकर खेला है

मुझे लगाकर सीने से हर दुःख को तूने झेला है

मेरे जीवन के बगिया की तू फुलवारी है,

माँ तू कितनी प्यारी है माँ तू कितनी प्यारी है

याद मुझे आ जाता है, वो बीता वक्त पुराना

डर जो लगे तो घबराकर तेरे आंचल में छिप जाना

चोट मुझे लगती थी, तो तकलीफ तुझे होती थी

मुझे दिलाती थी हिम्मत, पर खुद ही तू रोती थी

मेरे खातिर तूने अपनी खुशिया वाऱी है, माँ तू कितनी प्यारी है माँ तू कितनी प्यारी है

मेरे चिंता की रेखाएं तू पहचान है जाती

मैं रहता हूँ चुप, फिर भी माँ सबकुछ जान है जाती

अनजानी राहों में था, मैं कभी भी जब घबराता

तेरे आशीर्वाद के साये में था, खुद को पाता

तेरे साथ तो मैंने कभी न हिम्मत हारी है,

माँ तू कितनी प्यारी है माँ तू कितनी प्यारी है

2 COMMENTS

  1. महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं : —–
    “देश में भले ही लड़कियों और महिलाओं के लिए कानून हों पर रिलायंस स्कूल जामनगर ( गुजरात ) में हिंदी शिक्षक की बेटी को बोर्ड परीक्षा नहीं देने दिया जाता है और उसी स्कूल में कार्यरत निर्दोष हिंदी शिक्षिका को अमानवीय प्रताड़नाएँ झेलनी पड़ती हैं :– क्योंकि [ उन्होंने रिलायंस स्कूल के प्रिंसिपल मिस्टर एस.सुंदरम के हिंदी दिवस (14-9-10) के दिन के इस कथन :- “बच्चों हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है, हिंदी टीचर आपको गलत पढ़ाते हैं।” तथा उसी विद्यालय के प्रतिदिन के प्रात: कालीन सभा में प्रिंसिपल सुंदरम बार-बार यह कहते हैं “बड़ों के पाँव छूना गुलामी की निशानी है, सभी शिक्षक-शिक्षिकाएँ अपनी बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ खरीद कर लाते हैं, गाँधीजी पुराने हो गए, उन्हें भूल जाओ, फेसबुक को अपनाओ तथा बच्चों अगर आपके मम्मी-पापा भी आप पर सख्ती करते हैं तो आप पुलिस में केस कर सकते हो”] जैसी बातों से असहमति जताई थी।
    राज्य के शिक्षामंत्री तथा मुख्यमंत्री महोदय से बार-बार निवेदन करने, महामहिम राष्ट्रपति-राज्यपाल, सी.बी.एस.ई. प्रधानमंत्री आदि के इंक्वायरी आदेश आने. के बावजूद कोई निदान नहीं मिला है ! सब कुछ दबाकर चीफ सेक्रेटरी गुजरात 2011 से ही बैठे हुए हैं”—–क्या ये देशभक्ति है ???
    रिलायंस की प्रताड़नाओं से तंग आकर रिलायंस पेट्रोलियम फैक्ट्री जामनगर ( गुजरात ) से सटे गांव ” नवागांव की महिला सरपंच झाला ज्योत्सना बा घनश्याम सिंह ने ( २3- २-१५ ) को अपने पूरे परिवार के साथ आत्महत्या कर लिया है, इस कुकृत्य को छुपाने की कोशिस की जा रही है — क्या आप मरने वाले किसानों को न्याय दिलाएंगे ( Contact- 9978041892 ) ??? इस किसान परिवार ने स्थानीय थाने से लेकर मुख्यमंत्री- प्रधानमंत्री और उच्च और सर्वोच्च न्यायालय तक गुहार लगाई थी पर सब रिलायंस के आगे – बेकार ” सब हमारे जेंब में हैं ” ऐसा रिलायंस के अधिकारी खुलेआम कहते हैं और यह साबित होता है क्योंकि महिला सरपंच तथा उनके परिवार द्वारा आत्महत्या के प्रयास पर भी अभी तक केस दर्ज नहीं हुआ है ( संलग्न फ़ाइलें अवश्य देखें ) !!!
    रिलायंस की हराम की कमाई डकार कर महिला समितियाँ और मानवाधिकार समितियाँ भी चुप हैं — मिस्टर अज़ीज़ ( 7600639265) सिक्का पटिया गाँव जामनगर( गुजरात ) निवासी को रिलायंस (वालों ने गलत इल्जाम लगाकर नेशनल सेक्यूरिटी एक्ट में बंद करवा दिया है जिससे आसपास के किसान लोग भी डरकर अपने जमीन के बकाया पैसे माँगने रिलायंस के पास नहीं जा रहे हैं !
    एक चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी सपना ( 9824597192) को रिलायंस द्वारा बहुत घृणित और अमानवीय व्यवहार के साथ निकाला गया वो गरीब महिला अधिकारियों के पैर पकड़कर फुट-फुट कर रोती रही और ये रिलायंस के राक्षस अधिकारी हँसते हुए महिलाओं की दुर्दशा करते रहते हैं ——- पर गरीबों की कौन सुनता है ???
    रिलायंस कंपनी के स्कूलों में हिंदी शिक्षक -शिक्षिकाओं के साथ जानवरों जैसा व्यवहार होता है लिखित निवेदन पर भी सरकार चुप है – दोस्तों नक्सलियों से ज्यादा खतरनाक अम्बानी है.नक्सलियों का दायरा सीमित है और अम्बानी की पहुँच देश के कोने कोने तक है ..नकसली अपना हक़ छीनने के लिए लड़ते है और अम्बानी दूसरो का हक़ छीनने की जद्दो जहद में लगा हुआ है .

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