करतारपुर कॉरीडोर मामला में  बुरे फंसे नवजोत सिंह सिद्धू

-अनिल अनूप 
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ समारोह में शामिल होने के बाद से नवजोत सिद्धू सुर्खियों में हैं। सत्ता के गलियारों से लेकर आम गलियों तक में सिद्धू  करतारपुर कोरिडोर खोलने को लेकर चर्चा में चल रहे थे। अकाली दल (बादल) के स. प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर बादल और विक्रमजीत मजीठिया को चुनौती देते हुए नवजोत सिद्धू कब अपनी लक्ष्मण रेखा पार कर गये उनको इस बात का एहसास ही नहीं हुआ। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व का समर्थन प्राप्त नवजोत सिद्धू उपरोक्त अकाली नेताओं का राजनीतिक आधार कमजोर करने के लक्ष्य से पंथक नेता के रूप में उभरने का प्रयास कर रहे थे। नवजोत सिद्धू के इस प्रयास को पंख पाकिस्तान से लौटने के बाद दिए ब्यान, कि पाक सरकार करतारपुर का रास्ता सिख श्रद्धालुओं के लिए खोलने को तैयार है, ने लगा दिए।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख बाजवा से गले मिलने की जो राजनीतिक भूल नवजोत सिद्धू ने की उस पर पर्दा डालने के लिए करतारपुर कोरिडोर का मुद्दा उछाल कर उन्होंने अपना बचाव तो किया ही साथ में सिख भावनाओं से भी एक प्रकार का खिलवाड़ ही किया। यह बात आज पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल द्वारा दिए ब्यान कि करतारपुर कोरिडोर को लेकर भारत से आज तक कोई आधिकारिक चर्चा नहीं हुई है को देखते हुए कही जा सकती है।
भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पहले ही कह चुके हैं कि पाकिस्तान की तरफ से इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया गया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तो यहां तक कह दिया कि करतारपुर कोरिडोर को लेकर पाकिस्तान से एक बार नहीं अनेक बार बातचीत करने की कोशिश भारत द्वारा अतीत में की गई लेकिन पाकिस्तान बातचीत को तैयार नहीं था।
भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ से दिए ब्यानों से नवजोत सिद्धू द्वारा दिए ब्यान की सच्चाई सामने आ गई है। सिद्धू अपनी एक गलती को छुपाने के लिए गलती पर गलती करता चला गया। अतीत में इन्हीं कालमों में लिखा था कि नवजोत सिद्धू एक भावनात्मक इंसान है और भावना में बहकर वह लक्ष्मण रेखा पार कर जाते हैं। करतारपुर कोरिडोर के मामले में भी यही हुआ है। सिद्धू के सार्वजनिक जीवन का यह एक कमजोर पक्ष है कि देश व समाज हित को दांव पर लगाकर राजनीति करना। एक जिम्मेवार राजनीतिज्ञ से कोई यह आशा नहीं करता लेकिन नवजोत सिद्धू ने किया, इसलिए वह कटघरे में है और अकाली दल बादल के ही नहीं बल्कि प्रत्येक उस व्यक्ति के निशाने पर हैं जो पाकिस्तान से उसकी नापाक हरकतों के कारण उससे नफरत करता है।
शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम मजीठिया ने संवाददाता सम्मेलन में नवजोत सिद्धू पर निशाना साधते हुए प्रश्नों की झड़ी लगा दी। बिक्रम मजीठिया ने कहा कि बीएसएफ के जवान को पीछे से गोली मारी गई, गर्दन काट दी, आंखें निकाल लीं। सिद्धू जिस जनरल के गले लगे थे, उससे हिसाब क्यों नहीं मांगते। आज पाक प्रवक्ता ने कह दिया है कि करतारपुर कोरिडोर पर कोई बात नहीं हुई। उसने यह भी कहा कि भारत अधिकृत कश्मीर में मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है, फोर्स बर्बरता कर रही है। सिद्धू पाक की भाषा बोल रहे हैं। सुषमा स्वराज, वीके सिंह कह चुके हैं कि कोरिडोर पर कोई बात नहीं हुई। निर्मला सीतारमण ने कहा है कि पाक सेना प्रमुख को गले मिलने से फौजियों का हौसला पस्त होता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि एलओसी पर हाई अर्लट किया गया है। सिद्धू की जफ्फी के बाद फौजियों की शहादत बढ़ी है। फिर भी सिद्धू ऐसे जता रहे हैं जैसे पाक तो सही है, भारत ही गलत है। उन्होंने कहा कि सिद्धू ने पाक जनरल को जफ्फी डाली। जो किसी भी देशभक्त भारतीय को अच्छा नहीं लगा। इनके अपने सीएम ने भी इसकी आलोचना की। इस गलती पर पर्दा डालने के लिए सिद्धू ने श्री गुरु नानक देव जी के नाम पर सियासत की। सिद्धू बताएं कि वह हिन्दुस्तानी है या पाकिस्तानी, क्योंकि ज्यादा बातें वह उधर की करते हैं। सबको पता है कि इमरान खान की सरकार फौज की कठपुतली सरकार है। पाकिस्तान पहले भी कई बार हमें डबल क्रॉस कर चुका है।
बिक्रम मजीठिया ने जो कहा है यह कटु सत्य है पाकिस्तान पर आवश्यकता से अधिक विश्वास कर नवजोत सिद्धू ने जो कुछ कहा और किया उससे उनका राजनीतिक कद छोटा हुआ है और साख कमजोर हुई है। सिद्धू एक नामवर व्यक्ति हैं और उनके कहे और किए का प्रभाव पड़ता है पर यह स्थिति तभी तक रहेगी जब तक उनका विश्वास बना रहेगा। आदमी की पहचान उसके कर्मों से ही होती है, और नवजोत सिद्धू ने अतीत में खेल के मैदान में या सार्वजनिक जीवन में जो किया उसी कारण उनका विश्वास व पहचान जन साधारण के बीच आज बनी हुई है। नवजोत सिद्धू आज जो कर्म करेगा उसका फल उन्हें भविष्य में मिलेगा। इसी को ही व्यक्ति का भाग्य कहा जाता है। सिद्धू के भाग्य में क्या है, यह बात सिद्धू द्वारा आज किए कर्म पर ही निर्भर करता है  .

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