लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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-बीनू भटनागर-
life

कौन कहता है,
अतीत में मत झांको!
कौन कहता है,
अतीत से मत सीखो!
पर अतीत को अपने,
कांधों पर ढोकर,
वर्तमान पर अपने,
न बोझ बनने दो!

कौन कहता है,
भविष्य की मत सोचो!
कौन कहता है,
भविष्य भ्रम है केवल!
पर भविष्य की चिंता में,
रातों में न करवटें बदलो!
भविष्य के लिये यों ही,
वर्तमान से न मुंह मोड़ो!

भूत, भविष्य और वर्तमान को,
एक ही डोर में पिरोकर,
सपने देखो,
फिर वर्तमान में जीकर देखो!

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