लेखक परिचय

श्‍यामल सुमन

श्‍यामल सुमन

१० जनवरी १९६० को सहरसा बिहार में जन्‍म। विद्युत अभियंत्रण मे डिप्लोमा। गीत ग़ज़ल, समसामयिक लेख व हास्य व्यंग्य लेखन। संप्रति : टाटा स्टील में प्रशासनिक अधिकारी।

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सच यही कि हर किसी को सच दिखाता आईना

ये भी सच कि सच किसी को कह न पाता आईना

 

रू-ब-रू हो आईने से बात पूछे गर कोई

कौन सुन पाता इसे बस बुदबुदाता आईना

 

जाने अनजाने बुराई आ ही जाती सोच में

आँख तब मिलते तो सचमुच मुँह चिढ़ाता आईना

 

कौन ऐसा आजकल जो अपने भीतर झाँक ले

आईना कमजोर हो तो छटपटाता आईना

 

आईना बनकर सुमन तू आईने को देख ले

सच अगर न कह सका तो टूट जाता आईना

 

One Response to “कविता ; छटपटाता आईना – श्यामल सुमन”

  1. MAHENDRA GUPTA

    ,जाने अनजाने बुराई आ ही जाती सोच में

    आँख तब मिलते तो सचमुच मुँह चिढ़ाता आइना आइना सब कुछ कहता है

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