लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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poetry

राजनीति के गलियारे में,

तीन व्यक्ति चर्चा में हैं

‘पप्पू’ तो हम सबका ही,

राज दुलारा है,

उसके गाल का डिंपल देखो,

कितना प्यारा प्यारा है!

देश संभालने की ख़ातिर वो,

नींद से उठकर आया है।

‘पप्पू’ पास ज़रूर होगा,

जापानी ट्यूटर का वादा है।

फेंकू की हुंकार से,

जनता को जोश आया है।

मन्दिर को पीछे करके,

विकास का नारा लाया है।

देखेंगे क्या वो कर पाता है।

इन दोनों के बीच में,

एक आम आदमी,

थोड़ा टेढ़ा, थोड़ा येड़ा,

सर्दी खांसी का मारा भी,

घुस आया है।

जनता ने साथ दिया तो वो,

संसद भवन छोड़कर,

हर बिल रामलीला मैदान में ही,

जनता के बीच पास करायेगा।

कुछ नई तरह से ही वो,

सरकार चलायेगा।

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