लेखक परिचय

एल. आर गान्धी

एल. आर गान्धी

अर्से से पत्रकारिता से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जुड़ा रहा हूँ … हिंदी व् पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है । सरकारी सेवा से अवकाश के बाद अनेक वेबसाईट्स के लिए विभिन्न विषयों पर ब्लॉग लेखन … मुख्यत व्यंग ,राजनीतिक ,समाजिक , धार्मिक व् पौराणिक . बेबाक ! … जो है सो है … सत्य -तथ्य से इतर कुछ भी नहीं .... अंतर्मन की आवाज़ को निर्भीक अभिव्यक्ति सत्य पर निजी विचारों और पारम्परिक सामाजिक कुंठाओं के लिए कोई स्थान नहीं .... उस सुदूर आकाश में उड़ रहे … बाज़ … की मानिंद जो एक निश्चित ऊंचाई पर बिना पंख हिलाए … उस बुलंदी पर है …स्थितप्रज्ञ … उतिष्ठकौन्तेय

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एल. आर. गाँधी

मुम्बई पर फिर से आतंकी हमला हुआ और हमारे हुक्मरान २६/११ हमले के वक्त जारी अपनी गीदड़ भभकियों को भूल गए……. फिर से ऐसा हमला हुआ तो हम आर पार की लड़ाई लडेंगे ? उल्टा हमारे ‘राजकुमार ‘ फरमा रहे हैं कि ऐसे हमले रोके नहीं जा सकते . सुरक्षा एजेंसियों को शाबाशी भी दे डाली और कहा कि बस एक प्रतिशत ही रह गए हैं आतंकी हमले. ‘राजकुमार’ के गुरूजी ‘दिग्गी मियां’ तो और भी दो कदम आगे बढ़ गए और बोले कि पाकिस्तान के मुकाबले तो हमारे यहाँ आतंक बहुत मामूली है- लगे हाथ आर. एस.एस व् हिन्दू संगठनों पर भी उंगली तान दी. इसे कहते हैं आतंक की राजनीति …. लोग मरते हैं, मरते रहे…. वोट बैंक फलता फूलता रहे !

हमारा पडोसी हमारे खिलाफ ‘ परोक्ष युद्ध ‘ छेड़े हुए है.. और हम अमन के कबूतर उड़ा रहे हैं. वे देश की वाणिज्य राजधानी पर ‘हमला ‘ कर हमारी अर्थ व्यवस्था को तहसनहस करने की फिराक में है और हम वार्ता का राग अलाप रहे हैं. पाक हमारे विरुद्ध मुसलसल जेहाद छेड़े हुए है. इस्लामिक स्टेट का मुख्य उदेश्य ‘ शरियत के अनुसार तब तक जेहाद जारी रखना है , जब तक निजाम ए मुस्तफा कायम न हो जाए. अर्थात इस्लाम का राज्य कायम हो जाए ! पश्चमी देशों ने इस तथ्य को भली भांति समझ लिया और ‘जेहादी तत्वों’ पर सख्त निगरानी की नीति अपना ली. अमेरीका पर ९/११ के बाद दूसरा जिहादी हमला सफल नहीं हो पाया.

जापान विश्व का एक मात्र देश है जहाँ ‘ कोई जेहादी परिंदा पर भी नहीं मार सकता ‘ जापानियों को पूरा विशवास है ! जापान ने ‘जेहादियों ‘ पर अपने देश में पूरण प्ररिबंध लगा रक्खा है. जापान में इस्लाम के प्रचार प्रसार पर कड़ा प्रतिबन्ध है.जापान में अब किसी मुसलमान को स्थाई रूप से रहने की इज़ाज़त नहीं दी जाती. जापान में मात्र २ लाख मुसलमान हैं जिन्हें नागरिकता दी गई है और वे जापानी भाषा में ही अपने मज़हबी कार्य करते हैं. इनमें भी अधिकाश विदेशी कंपनियों के कर्मचारी है. किन्तु आज कोई भी कंपनी किसी मुसलमान को यदि जापान भेजती है तो उसे इज़ाज़त नहीं दी जाती यहाँ कोई इस्लामी मदरसा नहीं खोला जा सकता. कारन ! जापानी मानते हैं की मुसलमान कट्टरवाद के पर्याय हैं. जापान में ‘पर्सनल ला ‘ जैसा कोई शगूफा नहीं. यदि कोई जापानी महिला किसी मुसलमान से शादी कर ले तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाता है.

टोकियो विश्व विद्यालय के विदेश अध्ययन के अध्यक्ष कोमिको यागी के अनुसार …जापानियों की यह मान्यता है कि इस्लाम संकीर्ण सोच का मज़हब है.

इसे कहते हैं ‘ आतंक के खिलाफ जीरो टालरेंस ‘ हमारे यहाँ सब इसका उल्टा है. मुसलमानों के लिए ‘शरिया’ के अनुसार अलग से ‘ पर्सनल ला’ हैं. मदरसों को खुले दिल से सरकारी सहायता दी जाती है जहाँ ‘ जेहाद ‘का पाठ पढाया जाता है. यदि कोई आतंकी मुसलमान पकड़ा जाता है तो हमारे दिग्गी मियां जैसे सेकुलर शैतान ‘भगवा आतंक ‘ का राग अलापने लगते हैं .. वैसे भी हमारे ‘सिंह साहेब’ तो देश की सभी सुख सुविधाओं पर मुसलमानों का पहला हक़ मानते हैं…. मुंबई के ७/१३ के हमले के बाद तो ऐसा प्रतीत होता है कि हमारी नपुंसक सरकार ने आतंकी तत्वों के आगे हथियार ही डाल दिए हैं. जब पिछले पकडे गए सजा याफ्ता आतंकियों को सजा / फांसी पर चढाने की हिम्मत नहीं तब ये सेकुलर शैतान सरकार और आतंकी पकड़ कर क्या उनका अचार डालेगी ?

5 Responses to “आतंक की राजनीति …..”

  1. MOHAN LAL YADAV

    gandhi जी आज नेताओ खासकर मनमोहन, दिग्गी, राहुल और न जाने कितने है जिन्हें देख ऐसा क्यों लगता है की अंधों के हाथ बटेर लग गई है. लेकिन आज के परिद्रश्य में उक्त तथ्य सटीक नहीं लगता, यहाँ ये अधिक उचित होगा अंधों में काना राजा, ये एकदम सटीक है. हमरे नेता जो कर रहे है वो उनकी योग्यता आदि से ठीक है अब एक अति उम्र दराज व्यक्ति से ये उम्मीद करना की वो खुद ऐसी घटनाओ को रोके ठीक न होगा, उसे तो जिम्मेदारी दी है की वो विन्ची के लिए फील्ड तैयार करे, सो वो vahi कर रहा है aakhir swamibhakti भी कोई चीज है. घर जाते जाते p . m . की कुर्सी जो मिली है. खैर मेरे भारत का ये इतिहास है की वो लुटते ही रहा है, फरक सिर्फ इतना है की पहले वो विदेशियों के हाटों लुटा अब उस अपने ही लूट रहे है………?

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  2. Anil Gupta,Meerut,India

    सारी समस्या की जड़ में हिन्दू मुस्लिम रिश्तों का अभी तक समाधान न होना है. एक डी एन ए टेस्ट में ये पाया गया की भारत में रहने वाले सभी हिन्दुओं व मुसलमानों का डी एन ए एक जैसा है. इससे पता चलता है की इस देश के हिन्दू व मुस्लमान एक ही रेस के हैं. एतिहासिक कारणों से कुछ लोगों ने मुस्लिम सुल्तानों के अथवा मुग़ल बादशाहों के ज़माने में इस्लाम कबूल किया, कभी बलात करना पड़ा और कभी सत्ता का लाभ उठाने के लिए अपना लिया. अब परिस्थितियां बदल गयी हैं. न तो मुस्लिम दमन चक्र है और न मुग़ल सल्तनत से लाभ उठाने की स्थिति है. देश में लोकतान्त्रिक व्यवस्था है जिसमे बहुमत का ही वर्चस्व रहता है. अतः समस्या को हमेशा के लिए सुलझा लेने के लिए देश के मुसलमानों को अपने पूर्वजों के धर्म में वापस आ जाना चाहिए. कोई जबरदस्ती नहीं. स्वेक्षा से. मध्य प्रदेश में सुन्दरलाल पटवा जी के मुख्यमंत्री होते हुए कुंवर महमूद अली गवर्नर थे. उन्होंने उज्जैन में पत्रकारों से स्स्पष्ट कहा की वो वहां के परमार राजपूत राजाओं के वंशज हैं. यही स्थिति देश के सभी मुसलमानों की है. और सब मुस्लमान ये बात जानते हैं. अगर ये सियासी लोग बीच में न आयें तो देश के ज्यादातर मुस्लमान वापस अपने पुरखों के घर वापस आ जायेंगे. लेकिन दिग्विजय सिंह जैसे सोनिया के तलुवे चाटू मुसलमानों को बरगलाना बंद करें. वैसे दिग्गी की असली जगह शाहदरा के पागलखाने में है. उन्हें वहीँ भेज देना उनके लिए बेहतर होगा और देश के लिए भी.

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  3. AJAY GOYAL

    rahul aur digvijya ko samunder mai laden kai pass chod do………………

    desh kai halat sahi ho jaigai……………………??????????????????????????

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  4. vimlesh

    गाँधी जी ये तो सास्वत सत्य है कि देश को कांग्रेस ने बर्बाद किया अपवादों को छोड़ दे .

    लेकिन इस बर्बादी में हम सब का बराबर योगदान रहा अन्यथा ६५ वर्षो तक देश कांग्रेस का गुलाम नही रहता ,

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  5. दिवस दिनेश गौड़

    Er. Diwas Dinesh Gaur

    आदरणीय गांधी जी, आलेख के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद…
    तुष्टिकरण की नीति धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपनाई जाती है| किन्तु अब तो धर्मनिरपेक्षता के अर्थों पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है|
    धर्मनिरपेक्ष वह है, जिसके बाप का कुछ अता पता नहीं अथवा जो सभी को अपना बाप मानता है|
    कसाब व अफज़ल गुरु को बचाने में यदि सरकार को मुस्लिम वोट बैंक खिसकने की चिंता है तो सबसे पहले उन मुसलामानों को मारकर भगाओ जो ऐसा करने पर सरकार से रुष्ट होंगे| क्योंकि एक आतंकवादी का साथ देने पर वे भी आतंकवादी ही कहलाएंगे|
    विन्ची भारत की तुलना पाकिस्तान व अफगानिस्तान से कर संतुष्ट है| अरे तुलना करनी ही है तो अमरीका या जापान से करो न|

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