एल. आर गान्धी

अर्से से पत्रकारिता से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जुड़ा रहा हूँ … हिंदी व् पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है । सरकारी सेवा से अवकाश के बाद अनेक वेबसाईट्स के लिए विभिन्न विषयों पर ब्लॉग लेखन … मुख्यत व्यंग ,राजनीतिक ,समाजिक , धार्मिक व् पौराणिक . बेबाक ! … जो है सो है … सत्य -तथ्य से इतर कुछ भी नहीं .... अंतर्मन की आवाज़ को निर्भीक अभिव्यक्ति सत्य पर निजी विचारों और पारम्परिक सामाजिक कुंठाओं के लिए कोई स्थान नहीं .... उस सुदूर आकाश में उड़ रहे … बाज़ … की मानिंद जो एक निश्चित ऊंचाई पर बिना पंख हिलाए … उस बुलंदी पर है …स्थितप्रज्ञ … उतिष्ठकौन्तेय

नींद क्यों रात भर नहीं आती

ड़ोस में नई नई उसारी गई मस्जिदों से लाउड स्पीकरों से ‘आज़ान ‘ अल्लाहो अकबर के कर्कश आगाज़ से जगा देती है ….. पी जी आई के सबसे बड़े ख्याति प्राप्त न्यूरो डाक्टर हैरान हैं …..
कि यह शख्स सोता क्यों नहीं ….. इस बार तो डाक्टर साहेब ने दुखी हो कर मेरा केस ‘पागलों ‘के
एक्सपर्ट को रैफर कर दिया है …. मैं सोचता हूँ ‘वह ‘ भी क्या करेगा ….. फिर से ग़ालिब की याद ! …… मौत का एक दिन मय्यन है …नींद क्यों रात भर नहीं आती।

निज़ाम-ए मुस्तफा

बापू की एक और इच्छा थी ,,,,वे कहते थे जब मेरा काम यहाँ पूरा हो जायेगा मैं पाक चला जाऊंगा। बापू की अधूरी इच्छा को पूरा करना अब गाँधी भक्त कांग्रेसियो और अफ़ज़ल गैंग के आज़ादी परस्त छात्रों और उनको उकसाने वाले बुद्धिजीवी अवार्डवापसी गैंग का है पाक जाएं और

अपने आकाओं की बिरियानी का हक़ अदा करें और निज़ाम-ए मुस्तफा कायम करने में अपना योगदान दें !!!!

पप्पू गिरी

खबरियों के लिए खबर थी और मनचलों के लिए सेल्फी लेने का एक मौका पप्पू महज़ ४००० हज़ार के गाँधी बैंक में बदलने जा पहुंचे ….. गाड़ियों का काफिला और अनगिनत अंग रक्षक साथ में पप्पू के पप्पियों की फौज ,ऊपर से खबरियों का झुण्ड – मधुमखियों की भांति पप्पू पर मंडरा रहा था …..
पप्पू इतरा रहे थे ….मैं इन लोगों के लिए लाइन में लगा हूँ ….. मोदी के सताए हुए हैं ये सब।

खान मियां का ‘हलाल -हलाला ‘

मुस्लिम देशों में ऐसी वहशीता का बहुत प्रचलन है ….. और सुविधा के अनुरूप ही सज़ा या मज़ा का चलन है। अफगानिस्तान में एक सैनिक ने एक गधे के साथ पशुगमन किया। उसे महज़ चार दिन कैद की सज़ा मिली और छूट गया। हमारे पडोसी देश ‘पाक ‘ के पश्चिमी पंजाब ,खैबर ,पख्तूनवा ,बलोचिस्तान आदि में पशुगमन का आंम प्रचलन है ……..