More
    Homeसाहित्‍यकवितापरम पिता से प्रार्थना

    परम पिता से प्रार्थना


    हे! परम पिता पूज्य परमात्मा,
    इस कोरोना का कर दो खात्मा।

    हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है,
    शवो का काफी अंबार लगा हुआ है।
    श्मशान में जगह कहीं नहीं है,
    वहां पर भी लंबी लाइन लगी है।
    कर दो प्रभु इन सबका खात्मा,
    हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।

    अस्तपतालो मे लंबी लाइन लगी है,
    आक्सीजन की वहां कमी बनी है।
    तीमारदार मरीजों के लिए खड़े है।
    अस्तपतालो के बाहर बोर्ड लगे पड़े है।
    कर दो प्रभु आक्सीजन की कमी का खात्मा,
    हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।।

    सारी दुनिया को तुझको पुकार रही,
    रहम की भीख तुझसे हैं मांग रही।
    ये सारी दुनिया अब लाचार हुई हैं,
    बिन इलाज के ये सब बेकार हुई है।
    कर दो प्रभु, इन सबका खात्मा,
    हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।।

    ये कैसा दुखद समय आया है,
    बेटा बाप के कंधो पर आया है।
    मां बहिन बिलख कर रो रही हैं,
    बेटे भाई से चिपट कर रो रही हैं।
    कर दो प्रभु इस रोदन का खात्मा,
    हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।।

    रोक लो प्रभु ,इन दुखो की बरसात को,
    कर दो प्रभु,तुम सुखो की बरसात को।
    दुखी लोगों को अमन चैन आने लगे,
    फिर से तेरा वे गुणगान करने लगे।
    कर दो प्रभु,इस महामारी का खात्मा,
    हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।।

    चारो तरफ निराशा का माहौल है,
    सभी लोगो का बहुत बुरा हाल है।
    कुछ टी वी चैनल डर फैला रहे हैं,
    दिखा दिखा कर लोगो को डरा रहे है।
    कर दो प्रभु,इस डर का तुम खात्मा,
    हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    12,268 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read