राजनीति

राहुल गांधी का अशिष्ट आचरण और देश की राजनीति

देश का संविधान लोकतंत्र की प्राण शक्ति अर्थात शांतिपूर्वक धरने और विरोध प्रदर्शन की अनुमति देता है। किसी भी लोकतंत्र में कोई भी सरकार तानाशाही न करने लगे, इसके लिए लोगों को शांतिपूर्वक धरना और विरोध प्रदर्शन करने के लिए यह संवैधानिक अधिकार प्रदान किया गया है। देश का शिक्षा मंत्री यदि किसी भी पेपर लीक मामले में संलिप्त है तो उसका त्यागपत्र मांगना विपक्षी दलों का संवैधानिक अधिकार है। परंतु त्यागपत्र की मांग से पहले यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि शिक्षा मंत्री का इस विषय में सीधा-सीधा हाथ स्पष्ट हो रहा है। सरकार यदि तानाशाही दिखा रही है तो उसके विरुद्ध भी सड़क पर उतरना और शांतिपूर्वक अपना विरोध प्रदर्शन करना देश के प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
इस सब के उपरांत भी इस संवैधानिक अधिकार के कुछ अपवाद हैं।जैसे आप देश की सुरक्षा को दाव पर नहीं लगा सकते, आप कोई भी ऐसा कार्य नहीं कर सकते जिससे देश में अराजकता उत्पन्न हो और गृह युद्ध को आमंत्रित करने वाली चीजों को बल मिले। चाहे शाहीन बाग रहा हो, चाहे किसानों का आंदोलन रहा हो और चाहे अब छात्रों का आंदोलन रहा हो, राहुल गांधी ने एक गैर जिम्मेदार नेता का आचरण करते हुए सत्ता प्राप्ति के प्रति अपनी लिप्सा को दिखाते हुए हर बार जलती हुई आग में घी डालने का काम किया है। उन्हें इस बात से कुछ नहीं लेना देना कि उनके द्वारा आग में घी डालने का परिणाम क्या होगा ? उन्हें तो बस सरकार को बदनाम करना है और उस बदनामी का लाभ अपने लिए सत्ता प्राप्ति के रूप में लेना है।
राहुल गांधी की योजना है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और चुनाव में धांधली के बिंदु पर यह विमर्श बनाए रखो कि मोदी लोकप्रिय नहीं हैं। इसी विमर्श को लोगों द्वारा किए जा रहे आंदोलनों के माध्यम से इस प्रकार दिखाने का प्रयास करो कि सारा देश मोदी के खिलाफ है । पंजाब के खालिस्तानी आतंकवादियों के आंदोलन को किसानों का आंदोलन दिखाओ। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश के मुसलमानों के द्वारा आंदोलन करवाओ। इसके बाद विदेशों की सहानुभूति ली जाए कि मोदी वास्तव में एक अत्याचारी प्रधानमंत्री हैं। जब इस प्रकार का माहौल बन जाए तो एक लोकप्रिय सरकार को सत्ता से धकेल कर अपने आप सत्ता पर कब्जा कर लो।
बात यहीं नहीं रुकेगी। उसके बाद क्या करना है ? यह भी अभी से तय मान लीजिए। उसके बाद यह होगा कि जो सनातनी लोग मोदी को सपोर्ट करते हैं, उनको चुन चुनकर समाप्त किया जाएगा। कुल मिलाकर परिस्थितियां ऐसी बनाई जाएंगी कि कांग्रेस और सेक्युलरिस्ट गैंग फिर सत्ता से बाहर नहीं निकल पाए । यह कोई काल्पनिक बात नहीं है। राहुल गांधी स्वयं कई बार ऐसा कह चुके हैं कि यदि एक बार सत्ता में आ गए तो फिर हम दिखाएंगे कि किस प्रकार सनातन जैसी रूढ़िवादी परंपरा का विनाश किया जाता है ?
देश के हिंदू समाज को जातियों में बांटने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। जिसमें एससी एसटी को देश के बहुसंख्यक समाज के विरुद्ध किया जा रहा है। आजकल बहुत तेजी से फेसबुक और सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्टों का प्रचलन बढ़ा है जो सनातन विरोध में लिखी जा रही हैं। उनमें एससी एसटी और बौद्धिस्ट महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनके पीछे एक षड्यंत्र कम कर रहा है। हमारा मानना है कि सरकारों को सनातन के विरोध में लिखी जा रही इस प्रकार की पोस्टों पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए। राहुल गांधी, केजरीवाल, ममता बनर्जी,कम्युनिस्ट, तमिलनाडु के वर्तमान मुख्यमंत्री विजय, सपा के नेता अखिलेश यादव आदि सब मिलकर हिंदू समाज में विभाजन पैदा करके टूटे हुए एक वर्ग को मुसलमानों और ईसाइयों के साथ जोड़कर सत्ता पलट करना चाहते हैं। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि ये सारे नेता इस समय यह समझ चुके हैं कि प्रधानमंत्री श्री मोदी यदि सत्ता में बने रहते हैं तो इन सबका जेल में जाना निश्चित है। जो इन्हें स्वीकार नहीं है। यही कारण है कि जैसे भी हो मोदी को बदनाम किया जाए – की नीति पर ये लोग काम कर रहे हैं। उनकी इस प्रकार की नीति रणनीति के कारण राजनीति इस समय चांडाल चौकड़ी बन चुकी है।
राहुल गांधी अपनी पार्टी में गांधी टोपी को समाप्त कर चुके हैं। कुर्ता धोती और कुर्ता पजामे को समाप्त कर चुके हैं। गले में डाला जाने वाला पार्टी का पटका भी समाप्त हो चुका है। वह स्वयं टी-शर्ट और पेंट पहनते हैं। उन्हें चलते देखकर ऐसा लगता है जैसे कोई यूरोपियन अंग्रेज चल रहा हो। उनकी चाल भी विदेशियों जैसी है। भारत के प्रति सोच भी विदेशियों जैसी है। चाणक्य ने ऐसे ही नहीं कह दिया था कि चंद्रगुप्त की महारानी हेलेना का पुत्र देश का सम्राट नहीं हो सकता।
अध्ययन के अभाव में हमने अपने अतीत को खंगालना छोड़ दिया है।अपनी उच्च और मान्य परंपराओं की पड़ताल करना छोड़ दिया है।
राहुल गांधी के आचरण पर विचार होना चाहिए। विचार इस पर भी होना चाहिए कि क्या वह प्रधानमंत्री हाउस के बाहर बाहर जाकर धरना देने के लिए संवैधानिक रूप से अधिकृत हैं ? और क्या उनका इस प्रकार का आचरण प्रधानमंत्री की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए छात्रों को अप्रत्यक्ष रूप से उकसाने की कार्यवाही नहीं माना जाना चाहिए ? देश के प्रत्येक नागरिक की भांति उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से धरना और प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 से प्राप्त है परंतु हमें ध्यान रखना चाहिए कि यह मौलिक अधिकार असीमित नहीं है। यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था ,शालीनता और भारत की संप्रभुता के अधीन रखा गया है। प्रधानमंत्री आवास जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के दृष्टिकोण से धारा 163 लागू रहती है। स्पष्ट है कि यहां पर बिना पूर्व अनुमति के कोई धरना प्रदर्शन नहीं हो सकता। बिना पूर्व अनुमति के यदि राहुल गांधी इस क्षेत्र में जाकर धरना प्रदर्शन दे रहे थे तो उन्होंने कानून का उल्लंघन किया है, यह माना जाना चाहिए। जिस संविधान की गरिमा की बात राहुल गांधी रह रहकर करते हैं उसी के विरुद्ध आचरण करना कितना संवैधानिक है ?
आग लगाना किसी नेता प्रतिपक्ष का काम नहीं होता। नेता प्रतिपक्ष का काम होता है कि आग को शांत किया जाए।
यदि सत्ता से किसी को दूर कर दिया गया है तो उसे अपने आप यह समीक्षा करनी चाहिए कि ऐसे कौन से कारण रहे हैं जिनके कारण सत्ता से दूर होना पड़ा है? उन कारणों की समीक्षा करने के बाद गलतियों को सुधारना चाहिए। यह लोकतंत्र है, जिसमें जनता आपको फिर अवसर दे सकती है। अवसर की प्रतीक्षा करनी पड़ती है, यह भी लोकतंत्र का एक विशेष गुण है। इसमें व्यक्ति को धैर्य रखना सिखाया जाता है, अधीरता नहीं, अधीरता व्यक्ति को उच्छृंखल बनाती है।

डॉ राकेश कुमार आर्य