लेखक परिचय

अब्दुल रशीद

अब्दुल रशीद

सिंगरौली मध्य प्रदेश। सच को कलमबंद कर पेश करना ही मेरे पत्रकारिता का मकसद है। मुझे भारतीय होने का गुमान है और यही मेरी पहचान है।

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अब्दुल रशीद

लोकतंत्र में कहा जाता है सत्ता जनता से जनता के लिए जनता के द्वारा चलता है। लेकिन क्या ऐसा होता है? आज जनता के वोट द्वारा सत्ता भले ही चुनी जाती है लेकिन न तो सत्ता जनता के हित में काम करती है और न ही जनता के भागीदारी को समझती है कारण जो भी हो लेकिन यही कड़वा सच है आज का। इस आधे अधूरे लोकतंत्र के परिभाषा के साथ लोकतंत्र अपूर्ण सा लगता है, कारण जो भी हो लेकिन यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं।

लोकतंत्र में वोट का महत्व राजनीतिज्ञ भली भांति जानते भी है और समझते भी। इसलिए तो राजनेता वोट को हासिल करने के लिए किसी भी तरह के हथकंडे को आजमाने से परहेज नहीं करते है। और वोटर कस्तूरी मृग की तरह कस्तूरी के महक के लिए दौड़ते है और शिकार हो जाते है। जबकी कस्तूरी उसी के पास रहती है। आज वोटर को जागरुक होना होगा लेकिन उनको जागरुक करेगा कौन, ये राजनेता जो वोटर के कस्तूरी का राज, राज रख कर अपना सत्ता बरकार रखना चाहती है या फिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ जो इन राजनेताओं के हाथ की कठपुतली और कारपोरेट जगत के अघोषित प्रवक्ता बन बैठे हैं। यह तो शुक्र है सोशल मीडिया का जहाँ कुछ भावनाएं आम जनता की व्यक्त हो जाती है। लेकिन अब इस पर भी राजनीति मेहरबान है।

यह सच है कि जनता के पास वोट की ताकत है। लेकिन राजनेता भी तो बिखराव और छलावा की कला में माहिर हैं क्योंकि वोट की ताकत जनसमूह में बटा है और यदि बिखर गया तो उसका इस्तेमाल अपने हित में किया जा सकता है। चुनाव के दौरान राजनेता अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन कर सत्ता हथिया लेते हैं और चुनाव के बाद जब भ्रम टुटता है तब वोटर के पास सिवाए पछताने के कुछ नहीं रह जाता है।

अब जरुरत है वोटरों को भी अपने महत्व को समझने कि और एक ताक़त की अगर भ्रम में पड़कर भ्रष्ट व्यक्ति का चुनाव हो गया और वह जनता के हित में काम नहीं कर रहा है तो राइट टू रिकाल से अपनी गलती का सुधार कर सके। राइट टू रिकाल से जहां एक ओर वोटर चुने राजनेता को वापस बुला सकता है वहीँ दुसरी ओर भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा सकता है। क्योंकि चुनने के बाद जो पांच साल के लिए कुछ भी करने को आजाद समझने लगते हैं और कुछ भी कर जाते हैं। राइट टू रिकाल उनके लिए ऐसा पासवर्ड होगा जो जनता के हित के विरुद्ध काम करने पर जनता द्वारा दी गई सत्ता की ताक़त को निष्क्रिय कर देगा और दुसरे योग्य व्यक्ति को मौका दे देगा।

 

 

2 Responses to “राइट टू रिकाल”

  1. Jeet Bhargava

    राईट टू रिकोल के भी कई लूप होल्स हैं. भ्रष्ट और नकारा नेताओं के कान मरोड़ने के दूसरे तरीको पर भी हमें सोचना चाहिए.

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  2. आर. सिंह

    R.Singh

    राईट टू रिकाल के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता होगी,उसे कराएगा कौन?

    Reply

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