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बढ़ती गर्मी अब छीन रही फुटबॉल की रफ्तार, 2026 World Cup पर नई चेतावनी

फुटबॉल का खेल सिर्फ पैरों से नहीं खेला जाता। उसमें फेफड़े लगते हैं, सांस लगती है, शरीर की रफ्तार लगती है। 90 मिनट तक लगातार ड़ते खिलाड़ी सिर्फ गेंद के पीछे नहीं भाग रहे होते, वे अपने शरीर की सीमा को भी धक्का दे रहे होते हैं। लेकिन अब दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल एक नए प्रतिद्वंद्वी से जूझने जा रहा है।

उसका नाम है, बढ़ती गर्मी।

Climate Central की नई analysis के मुताबिक 2026 FIFA World Cup के 104 में से 97 मैचों में climate change के कारण performance-impairing heat की संभावना बढ़ गई है, और 49 मैचों में यह संभावना 50% या उससे ज्यादा है।” रिपोर्ट के मुताबिक 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान फुटबॉल खिलाड़ियों की रफ्तार, recovery और मैदान पर उनकी कुल सक्रियता को प्रभावित करता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि इस तापमान के बाद sprint frequency कम होने लगती है, खिलाड़ी कम दूरी तय करते हैं और शरीर को recover होने में ज्यादा समय लगता है। यानी असर सिर्फ खिलाड़ियों की सेहत पर नहीं पड़ेगा। खेल का tempo बदलेगा। रणनीति बदलेगी। मैच का flow बदल सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग आधे मैचों में ऐसी गर्मी पड़ने की संभावना 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा है, जो खिलाड़ी की performance को प्रभावित कर सकती है। इनमें से 26 मैच ऐसे हैं जहां climate change की वजह से यह संभावना कम से कम 10 percentage points तक बढ़ गई है। सबसे ज्यादा जोखिम 26 जून को मेक्सिको के Guadalajara में होने वाले Uruguay और Spain के मैच में बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस मैच में performance-impairing heat की संभावना 70 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, और climate change ने इस जोखिम को 37 percentage points तक बढ़ाया है। यह World Cup अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में खेला जाएगा। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि rising temperatures और heatwaves अब खेलों के कैलेंडर और nature दोनों को बदलने लगे हैं।

Climate Central के meteorologist Shel Winkley कहते हैं कि पुराने World Cups अब वैसे दोबारा नहीं होंगे, क्योंकि ग्रह बदल चुका है। उनके मुताबिक heatwaves, unpredictable weather और shifting seasons खेलों के नियम बदल रहे हैं। खिलाड़ी अब ज्यादा सावधानी से खेलेंगे, अपनी strategy बदलेंगे और कई बार वे जोखिम लेने से बचेंगे जो कभी खेल को रोमांचक बनाते थे। Norway की national team के खिलाड़ी Morten Thorsby, जो 2026 World Cup में खेलने वाले हैं, कहते हैं कि बढ़ती गर्मी सिर्फ खिलाड़ियों और fans के लिए health risk नहीं है, बल्कि यह खेल की गुणवत्ता को भी प्रभावित करने लगी है। उनके मुताबिक जब गर्मी sprinting और recovery को प्रभावित करती है, तो फुटबॉल का पूरा तरीका बदल जाता है। University of Portsmouth के Professor Mike Tipton कहते हैं कि 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर खेलना tactics, tempo और खेल की quality को प्रभावित करता है। खिलाड़ियों की intensity घटती है, sprinting कम होती है और goal-scoring chances भी कम बन सकते हैं।

वे चेतावनी देते हैं कि अगर तापमान और बढ़ता है, तो heat exhaustion और heat stroke जैसे खतरे भी बढ़ेंगे, खासकर high-stakes matches में जहां खिलाड़ी अपनी शारीरिक सीमाओं से आगे जाने की कोशिश करते हैं। Climate Central ने अपने analysis में 2026 World Cup के सभी मैचों की तारीख और location का अध्ययन किया। इसके बाद researchers ने यह आकलन किया कि कितने मैचों में तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। फिर इसकी तुलना उस काल्पनिक दुनिया से की गई जहां human-caused climate change नहीं होता। इसी comparison से यह समझने की कोशिश की गई कि global warming ने गर्मी के इस जोखिम को कितना बढ़ाया है। पूर्व Jamaican Premier League खिलाड़ी Alex Jacobs कहते हैं कि गर्मी फुटबॉल के लिए नई चीज नहीं है, लेकिन climate change से बढ़ी extreme heat इस बार दुनिया के सबसे बड़े sporting event में बड़ा फर्क पैदा कर सकती है। American Meteorological Society के Honorary Member John Toohey-Morales याद दिलाते हैं कि एक midfielder एक मैच में औसतन 10 किलोमीटर से ज्यादा दौड़ता है। लगातार direction बदलना, तेज acceleration और high-intensity movement इस खेल का हिस्सा है। ऐसे में बढ़ती गर्मी खिलाड़ियों की गति को धीमा कर सकती है।

दुनिया लंबे समय से climate change को glaciers, floods और heatwaves की कहानी की तरह सुनती रही है। लेकिन अब उसका असर stadiums तक पहुंच चुका है। शायद आने वाले सालों में फुटबॉल का सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि कौन बेहतर खेलता है। सवाल यह भी होगा कि कौन ज्यादा गर्मी झेल पाता है।