लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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विपिन कुमार सिन्‍हा

Shaharukh ka sachशाहरुख खान का एक लेख एक अमेरिकी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है जिसमें उन्होंने भारत में मुसलमानों से भेदभाव का आरोप लगाया है। उनके इस रहस्योद्घाटन से आहत पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भारत सरकार से शाहरुख खान को सुरक्षा प्रदान करने का अनुरोध किया है और आतंकवादी सरगना हाफ़िज़ सईद ने उन्हें भारत छोड़कर पाकिस्तान में बसने की सलाह दी है। भारत में भी कट्टर मुसलमानों के अतिरिक्त उदारवादी मुसलमानों ने भी शाहरुख खान के वक्तव्य से सहमति प्रकट की है।

इस समय मुसलमानों के कुछ कथित रहनुमाओं ने आज़ादी की पूर्व वाली स्थिति का निर्माण करने का बीड़ा उठाया है। इस अभियान के तहत हैदराबाद के कुख्यात विधायक ओवैसी ने सार्वजनिक भाषण दिया कि यदि भारत सरकार १५ मिनट के लिए पुलिस को हटा ले, तो भारत के मुसलमान सौ करोड़ हिन्दुओं का सफ़ाया कर देंगे। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री भारत माता को डायन कहते हैं। भारत सरकार द्वारा पद्म पुरस्कार से नवाज़े गए चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसेन भारत माता और हिन्दू देवी-देवताओं के नग्न चित्र बनाकर चित्र-प्रदर्शनी में सजाते हैं। मुस्लिम समुदाय इसकी निन्दा नहीं करता। कारण – मुस्लिम समुदाय में व्याप्त कुछ अलगाववादी तत्त्व इन सेलिब्रेटी कलाकारों और नेताओं के वक्तव्य को अपनी तहरीर में बार-बार दोहराकर जनमानस में अलगाववादी भावनाएं भरने में सफल हो जाते हैं। मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना भरने के लिए शाहरुख खान जैसे तत्त्व ही जिम्मेदार हैं। समझ में नहीं आता कि जबतक भारतीय जनता उनको सिर-आंखों पर बिठाकर रखती है, तबतक तो वे सर्वजन की बात करते हैं लेकिन जैसे ही उनका कैरियर ढलान पर पहुंचता है, उन्हें अपने एवं अपने संप्रदाय के साथ भेदभाव नज़र आने लगता है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान अज़हरुद्दीन, जबतक कप्तान रहे, प्रसन्न रहे लेकिन जैसे ही हेन्सी क्रोनिए के साथ मैच फिक्सिंग में उनकी संलिप्तता के प्रमाण सामने आए, उन्होंने यह कहना शुरु कर दिया कि मुसलमान होने के कारण उन्हें फंसाया गया है। शाहरुख खान का भी कैरियर ढलान पर है। वे इसे पचा नहीं पा रहे हैं।

अपने क्षुद्र स्वार्थों में फंसे ये लोग उस देश और उस समुदाय पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं जिसने अपने हितों की बलि देकर इन्हें प्रोत्साहित किया है। क्या यह सत्य नहीं है कि धर्म के आधार पर देश के विभाजन के बाद भी भारत की सरकार और बहुसंख्यक हिन्दू समाज ने भारत में रहने के इच्छुक १२ करोड़ मुसलमानों को सुरक्षा प्रदान की? आज भी भारत के मुसलमान जितना इस देश में सुरक्षित हैं, उतना विश्व के किसी भी देश में नहीं। जिस शाहरुख खान ने भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव की शिकायत की है, उसी शाहरुख खान के कपड़े तक अमेरिका के हवाई अड्डे पर सुरक्षा-जांच के नाम पर उतरवा दिए गए थे; फिर भी वे अमेरिका जाने के लिए लालायित रहते हैं और जिस देश और समुदाय ने उन्हें सुपर स्टार बनाया उसके खिलाफ़ अनर्गल प्रलाप करते है।

जिस देश में राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद पर तीन-तीन मुसलमान चुने जा चुके हों, ब्यूरोक्रेसी से लेकर राजनीति, न्यायपालिका से लेकर कार्यपालिका के शीर्ष तक जिस संप्रदाय के सदस्य प्रतिष्ठित रहे हों, वहां यह आरोप लगाया जाता है कि धर्म के नाम पर मुसलमानों से भेदभाव किया जाता है। यह आश्चर्यजनक ही नहीं अत्यन्त दुखद और शोचनीय भी है। तथ्य यह है कि संगठित वोट बैंक होने के कारण मुसलमानों को विशेषाधिकार प्राप्त है जो हिन्दू समुदाय या किसी अन्य अल्पसंख्यक संप्रदाय को प्राप्त नहीं है। उन्हें उनके धार्मिक क्रिया-कलापों के लिए भी सरकारी खज़ाने से धन उपलब्ध कराया जाता है। हज़ यात्रा के लिए हजारों करोड़ रुपयों की सब्सिडी दी जाती है, जो टैक्स के माध्यम से बहुसंख्यक जनता से वसूला जाता है। हिन्दुओं के सभी बड़े मन्दिरों को सरकार ने अधिगृहित कर रखा है, वहां के चढ़ावे पर भी सरकार का ही अधिकार है। लेकिन कोई भी मस्ज़िद सरकारी नियंत्रण में नहीं है। दिल्ली के ज़ामा मस्ज़िद को पाकिस्तानी झंडा लगाने की भी अनुमति प्राप्त है। शुक्रवार की दोपहर में हर मुसलमान को सरकारी महकमों में दो घंटे की शार्ट लीव नमाज़ पढ़ने के लिए दी जाती है। ऐसी सुविधा किसी अन्य धर्मावलंबी को नहीं मिलती। मुसलमानों के मदरसों को सरकारी अनुदान मिलता है और हिन्दुओं के सरस्वती शिशु मन्दिरों को बन्द कराने का प्रयास किया जाता है। इस देश ने जो सम्मान दिलीप कुमार (युसुफ़ खान), सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान सैफ़ अली खान और मुहम्मद रफ़ी को दिया है, उतना सम्मान क्या राज कपूर, देवानन्द, राजेन्द्र कुमार, अजय देवगन, कुन्दन लाल सहगल, मुकेश या किशोर कुमार को दिया है? सलमान खान मुंबई में सड़क के किनारे सो रहे चार लोगों को अपनी गाड़ी चढ़ाकर मार डालता है, उसका कुछ नहीं होता, सैफ़ अली खान रेस्टोरेन्ट में एक संभ्रान्त प्रवासी भारतीय के दांत अपने घूंसे से तोड़ देता है, पुलिस गिरफ़्तार भी नहीं करती। संविधान में संसोधन द्वारा हिन्दू कोड बिल पास करके हिन्दुओं के धार्मिक मामलों में खुला हस्तक्षेप किया जाता है लेकिन मुस्लिम पर्सनल ला को छूआ भी नही जाता। भारत के अतिरिक्त विश्व के किस देश में मुसलमानों को ऐसी सुविधाएं सहज ही उपलब्ध हैं?

वास्तविकता यह है कि भारत में मुसलमानों को विशेषाधिकार प्राप्त है जिसके कारण फिल्म इन्डस्ट्री से लेकर कला-संगीत के क्षेत्र में भी उनका प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या से अधिक है। भेदभाव की बात करने वाले सुनियोजित ढंग से इस देश की अखंडता, एकता और धार्मिक सहिष्णुता पर प्रहार कर रहे है; साथ ही देशभक्त मुसलमानों की निष्ठा भी संदिग्ध कर रहे हैं।

3 Responses to “शाहरुख का सच”

  1. abhishek shukla

    मजहब नहीँ सिखाता,
    आपस मेँ बैर रखना,
    हिन्दी हैँ हम वतन है,
    हिन्दुस्ताँ हमारा

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  2. Anil Gupta

    सच तो ये है की लगभग चौथाई सदी तक भारत के चित्रपट पर छये रहने के बावजूद शाहरुख़ खान इस देश की सभ्यता को आत्मसात नहीं कर पाए हैं.किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में वो एक खास अंदाज में केवल आदाब ही करते हैं. आजतक वो ‘नमस्ते’ करते नजर नहीं आये. उनकी फिल्म ‘माई नेम इज खान’से भी यही ध्वनित होता है की उन्हें केवल मुस्लिम होने के कारन ही सताया जा रहा है. यही काम एक अवसर पर मेच फिक्सिंग के आरोपों से घिरे अजहरुद्दीन ने भी किया था. भारत जैसी आजादी तो मुस्लिमों को मुस्लिम अरब देशों और पाकिस्तान में भी हासिल नहीं है. फिर भी अगर वो ऐसा मानते हैं की भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव होता है तो ये दुर्भाग्यपूर्ण तो है ही साथ ही उनकी कृतघ्नता को भी दर्शाता है.उनकी पत्नी गौरी हिन्दू है. लेकिन शाहरुख़ पर इसका कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता.

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  3. NARENDRASINH

    जिस देश में राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद पर तीन-तीन मुसलमान चुने जा चुके हों, ब्यूरोक्रेसी से लेकर राजनीति, न्यायपालिका से लेकर कार्यपालिका के शीर्ष तक जिस संप्रदाय के सदस्य प्रतिष्ठित रहे हों, वहां यह आरोप लगाया जाता है कि धर्म के नाम पर मुसलमानों से भेदभाव किया जाता है। यह आश्चर्यजनक ही नहीं अत्यन्त दुखद और शोचनीय भी है।

    ये बाते इन गद्दारों को मालूम नहीं है आज से नहीं बचपन से ये सभी लोग येही सोचते आये है और इनको येही पढाया गया है ….

    लेकिन अब भारतीयों को जागना चाहिए और इन गद्दारों को बता देना चाहिए की हम क्या कर सकते है .
    इसको साथ देने वाले और इसकी बातो को जायज ठहराने वाले तमाम को गद्दार करार देते हुवे पाकिस्तान रवाना कर देना चाहिए .

    अगर शाहरुख़ में जरा भी खुद्दारी है तो उसको पाकिस्तान चला जाना चाहिए ???///

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