श्राद्ध , श्रद्धा है या आडम्बर

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जीवन में अजीब अचम्भा देखा
जीते जी आदमी को भूखा देखा
मरने के बाद उसको खाते देखा
सदियों से चलती इस रीति को देखा
श्राद्ध के नाम पर इस श्रद्धा को देखा
देख रहे है आज उसे अनदेखा देखा

वर्तमान की चिंता आज नहीं कर रहा
भविष्य की चिंता आज किये जा रहा
मानव किस मार्ग पर आज चल रहा
चल कर भी उसे पता नहीं चल रहा
सदियों से निभाता चला वह आ रहा
इसी को श्राद्ध का नाम दिया जा रहा

घर घर में चल रही ये कहानी है
कोई जानी है कोई अनजानी है
पर ये सब की जानी पहचानी है
यह श्रद्धा है, या कोई नादानी है
इस नादानी को अब बदलनी है
श्राद्ध को श्रद्धा में ही बदलनी है

अगर आज श्राद्ध श्रद्धा में बदल जायेगा
तो मानव का स्वरूप ही बदल जायेगा
दुःख ,सुख में परिवर्तित हो जायेगा
आडम्बरो का विनाश ही हो जायेगा
आओ आज श्राद्ध को श्रद्धा में बदले हम
पुरानी लकीरों को नई लकीरों में बदले हम

आर के रस्तोगी

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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