सोनिया कांग्रेस चली मुसालिनी की राह

 डॉ0 कुलदीप चंद अग्निहोत्री

अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को लेकर सोनिया कांग्रेस की सरकार ने जो तेवर दिखाए हैं , उससे स्वाभाविक ही इटली में मुसोलिनी के फासीवाद की याद ताजा हो जाती है। मुसोलिनी ने अपने विरोधियों के बोलने के अधिकार को ही बर्खास्त नहीं किया था बल्कि उन्हें अपराधी घोषित करके दंडित करने की अलोकतांत्रिक और अमानवीय राह भी अपनायी थी। लगता है सोनिया कांग्रेस उसी इतिहास को भारत में दुहराना चाहती है, ताकि यहां भी सत्य और न्याय के स्वरों को सदा के लिए दफना दिया जाए और अपने दरबारियों के बलबूते देश पर लम्बे समय तक तानाशाही लाद दी जाए । इसे इतिहास का संयोग ही कहना चाहिए कि जिस प्रकार मुसोलिनी को उसके दरबारियों ने घेर रखा था और वे सदा-सर्वदा उसकी जयजय कार के नारे लगाते रहते थे , उसी प्रकार सोनिया कांग्रेस की अध्यक्षा के इर्द-गिर्द , पी0सी0 चिदम्बरम , दिग्विजय सिंह और जनार्दन द्विवेदी जैसे लोगों का जमावडा बैठा है। लेकिन इसे भारतीय इतिहास की त्रासदी ही कहा जाना चाहिए कि इन दरबारियों का अधिकार केवल सोनिया गांधी की जयजयकार करने तक है। या फिर अन्ना हजारे और बाबा रामदेव जैसे संतों को गालियां देने तक सीमित है। सोनिया कांग्रेस में उसकी अध्यक्षा ने असली सत्ता अहमद पटेलों , ए.के. एण्टोनियों ,राशिद अल्वियों , सलमान खुर्शीदों , अब्दुल रहमान अंतुलों जैसों के हाथ में ही है।

जाहिर है जब सोनिया कांग्रेस की भीतरी कार्यप्रणाली और वैचारिक चेतना फासीवाद से प्रेरित है तो धरातल पर उसके परिणाम दिखायी देंगे ही । कुछ अरसा पहले , विदेशी बैंकों से भारतीय धन को वापस लाने की मांग कर रहे हजारों भारतीयों पर रात को सोते वक्त लाठी चार्ज करना और अश्रु गैस के गोल छोडना और अंत में मंच को आग लगा देना , इसका प्रमाण है। अब यही कुछ अन्ना हजारे के साथ किया जा रहा है। अन्ना हजारे का दोष केवल इतना है कि वे भ्रष्टाचारियों की शिनाख्त करने और उन्हें कडे से कडा दंड देने की मांग कर रहे हैं । दुर्भाग्य से सोनिया कांग्रेस का सारा ताना -बाना ही इस भ्रष्टाचार पर खडा है। इटली के व्यवसायी क्वात्रोची द्वारा बोफोर्स कांड में करोडों रुपये डकार जाने की बात देश अभी भूला नहीं है। यह भी सब जानते हैं कि यह क्वात्रोची सोनिया गांधी के घर में ही रहता था और उसको सही सलामत देश से भगाने में उन्हीं जांच एजेंसियों की भूमिका है जो आज अन्ना हजारे और बाबा रामदेव को अपराधी सिद्ध करने के काम में जुटी हुई हैं ।सोनिया कांग्रेस की सरकार अन्ना हजारे और बाबा रामदेव दोनों से ही नूराकुश्ती लडना चाहती थी ताकि सरकार की साख भी बची रहे और भ्रष्टाचारियों का बाल भी बांका न हो । बाबा रामदेव ने इसका विरोध किया तो उन पर जो बीती वह कल की बात है। अन्ना हजारे के विरोध के बारे में भी कपिल सिब्बल का यही तर्क है। कपिल सिब्बल आज सोनिया कांग्रेस के सबसे बडे वकील हैं। उनका कहना है कि अन्ना हजारे सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तो कर सकते हैं लेकिन उन्हें यह विरोध प्रदर्शन सरकार द्वारा निर्धारित शर्तांे पर ही करना होगा । इस प्रकार का दिखावे का विरोध मुसोलिनी के फासीवाद में तो संभव था लेकिन भारत के लोकतंत्र में संभव नहीं है क्योंकि अन्ना हजारे सचमुच ही भ्रष्टाचार से अपनी पूरी शक्ति से लडने के लिए निकल चुके हैं। वे कपिल सिब्बल , अम्बिक सोनी और सोनिया गांधी की तरह भ्रष्टाचार से लडने का पाखंड नहीं कर रहे । सोनिया गांधी और कपिल सिब्बल दोनो यह अच्छी तरह जानते हैं कि सरकारी शर्तो पर भ्रष्टाचार तो संभव है , सरकारी शर्तो पर विरोध संभव नहीं है। जिस कारपोरेट जगत से समझौता करके , सरकार ऐसी नीतियां निर्धारित करती है जिससे कारपोरेट जगत के चंद लोगों को तो अरबों को फायदा हो जाए और भारतीय सम्पत्ति विदेशी बैंकों मंे चली जाए , वह सरकारी शर्ताें पर किया गया भ्रष्टाचार ही है क्योंकि इस लूट का एक हिस्सा उन्हीं नीति निर्धारकों की जेब में चला जाता है जो आज एक कतार में खडे होकर अन्ना हजारे और बाबा रामदेव को गालियां निकाल रहे हैं।

सोनिया कांग्रेस का कहना है कि कानून बनाने का अधिकार संसद को ही है।कपिल सिब्बल और पी.सी चिदम्बरम सोनिया गांधी की इस बाईबल वाणी को मुंह बिगाड -बिगाडकर ब्रिटिश अंग्रेजी में देश की जनता को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। यह कोई इतना बडा छिपा हुआ रहस्य नहीं है जिसे इसे देश की आम जनता नहीं जानती है। केवल इस रहस्य को बताने के लिए सोनिया कांग्रेस की जरुरत इस देश में नहीं है। लेकिन कपिल सिब्बल इतना तो जानते ही हांेगे की संविधान इस देश की अंतिम शक्ति इस देश के 120 करोड लोगों को ही देता है। संविधान की शुरुआत ही हम भारत के लोग से होती है। सोनिया कांग्रेस को असली डर भारत के इन्हीं लोगों से है। अन्ना हजारे आज भारत की इसी आंतरिक आवाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं । सोनिया कांग्रेस का कहना है कि अन्ना हजारे अपना जन लोकपाल विल संसद से दबाव डालकर पास करवाना चाहते हैं । कपिल सिब्बल जैसे लोग तुरंत इसकी व्याख्या ब्लैकमेलिंग से करते हैं। प्रश्न जनलोकपाल बिल का भी नहीं है । संसद क्या पास करती है और क्या नहीं -यह प्रश्न भी नहीं है। असली प्रश्न अन्ना हजारे के और भारत के लोगों के लोकतांत्रिक ढंग से विरोध करने के अधिकार का है। सरकार दरअसल , इसी अधिकार को कुचलना चाहती है । सरकार का कहना है कि अन्ना हजारे धारा 144 को तोडना चाहते थे , इसलिए उन्हें जयप्रकाश पार्क में पहुंचने से पहले ही नजरबंद कर लिया गया । ताज्जुब है जब युवराज राहुल गांधी भट्टा पारसौल में धारा 144 तोडने के लिए अपने लाव-लश्कर के साथ जाते हैं तो सोनिया कांग्रेस का कहना है कि यह लोगों के हितों के लिए लडी जा रही लडाई है।जब अन्ना हजारे उस स्थान की ओर जाते हैं जहां धारा 144 लगी हुई है तो उन्हें उस स्थान पर पहुंचाने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया जाता है और सोनिया गांधी के ऐलची इसे असंवैधानिका और गुंडागर्दी बताते हैं। राहुल गांधी वही काम करे तो जनसंघर्ष और अन्ना हजारे करे तो गुंडा गर्दी । यह मुसोलिनी के फासीवाद मे ही संभव है। विक्रमादित्य और लालबहादुर शास्त्री के भारत में नहीं । लेकिन विक्रमादित्य और लालबहादुर शास्त्री के भारत की चेतना को तो वही पहचान पाएगा जो किसी न किसी रुप में उनकी विरासत से जुडा हुआ हो ।

सोनिया कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ओसामा बिन लादेन जी , भाई अफजल गुरु जी और हजरत कसाब जी के लिए तो दिन रात कसीदे पढते हैं लेकिन अन्ना हजारे को तिहाड जेल भेजे जाने पर बच्चों की तरफ तालियां बजा-बजाकर खुशी का इजहार करते हैं।इसे संयोग कहा जाए या दुर्योग कि सोनिया कांग्रेस की सरकार ने तिहाड जेल मंें अन्ना हजारे को सुरेश कलमाडी के वार्ड में ही कैद किया । उससे चुटकुला देशभर में प्रसिद्ध हो गया है कि सुरेश कलमाडी ने अन्ना हजारे से कहा कि तुम इतने बडे झमेले में पडे हुए हो । तुम्हारे साथ कौन है। अन्ना हजारे ने यही प्रश्न सुरेश कलमाडी से किया और यह भी पूछा कि तुम इतने बडे घोटाले किसके बलबूते पर कर रहे हो और किसके बलबूते पर इसको झेल रहो हो तो कलमाडी ने कहा -सोनिया कांग्रेस के बलबूते पर । इसी प्रश्न के उत्तर मे ंअन्ना हजारे ने कहा कि मैं तो यह सबकुछ भारत मां और भारत के लोगों के बलबूते पर कर रहा हूंॅ।इतना तो जाहिर ही है कि इस देश में वही जीतेगा जो अपनी लडाई भारत मांॅ और भारत के लोगों के बलबूते पर लडेगा । भ्रष्टाचारियों की वह फौज जो सोनिया कांग्रेस के बलबूते पर अपना बचाव करना चाह रही है , वह अंततः हारेगी। पता चला है अब अन्ना भी रामलीला क्षेत्र में पहुच गए है ।इस क्षेत्र में सोनिया कांग्रेस की रावणलीला का अंत तो निश्चित ही है, फिर चाहे सैनिक वेश में कितने ही कपिल सिब्बल, पी.सी. चिदम्बरम और दिग्विजय सिंह सोनिया कांग्रेस की ढाल बनकर घूमते रहे।

3 thoughts on “सोनिया कांग्रेस चली मुसालिनी की राह

  1. सारे चूहे जहाज को डुबाकर भागने वाले हैं| मन मोहन सिंह पर हार का ठीकरा फूटने वाला है| सारे जयचंद, “पराजयचंद” साबित होंगे|
    सोनिया डोर खिंच रही है, निति में बदलाव स्पष्ट है|

  2. डॉ. कुलदीप जी ने बहुत अच्छा उदहारण दिया है. बिलकुल सही बात कही है.
    * वैसे आजादी की ६२-63 सालो के बाद ही सही हमारे देश के आम लोगो में अंग्रेजो की गुलामी मानसिकता का वायरस कमजोर तो हो रहा है.
    लोग सच्चाई को जानने का प्रयास कर रहे है. सत्य को सुनने का प्रयास तो कर रहे है. सच्चा इतिहास जानना चाहते है.

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