विद्यालय विकास में अध्यापक का विशेष योगदान

वर्त्तमान में विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है | जो कि जन प्रतिनिधियों व अभिभावकों की सुगमता को ध्यान में रखकर विकास खंड के क्षेत्रीय विद्यालयों में कराया जा रहा है | जिनमे मुझे दिनांक – 19/09/2011 से 21/09/2011 तक प्रथम पाली में प्रशिक्षक श्री दिनेश सिंह राना जी व नोडल अधिकारी श्री एच. के. . जोशी जी के साथ केंद्र – कुटरा, संकुल – गराबागबि में प्रतिभाग करना था | जहा पर मुझे भी माड्यूल के सभी बिन्दुओ पर सहयोग व सूचना का अधिकार अधिनियम -2005 व विद्यालय विकास योजना के बिंदु पर प्रशिक्षण देने हेतु विशेष अवसर मिला | जहा पर एक अध्यापक के ऐसे सराहनीय कार्य अभिभावकों द्वारा बताये गए जो पहले उन्होंने अपने आप कभी किसी को नहीं बताये थे, जो कि विद्यालय प्रबंध समिति के के सचिव है | जब मेरे द्वारा उनसे ये जाना गया कि आपने ये आजतक पहले कभी नहीं बताया तो उन्होंने बताया कि ये तो मुतीत कार्य है |

इसमें नाम कमाकर क्या करना |

अध्यापक महोदय के सराहनीय कार्य व परिचय –

नाम – श्री नारायण सिंह राना (हैड )

विद्यालय- राजकीय प्राथमिक विद्यालय छिनकी ( देवकला ) दुर्गम क्षेत्र जहा वर्तमान में ही पुल बना है | पहले नाला पर करना होता था |

इस विद्यालय में नियुक्ति -26/10/2005

कुल अध्यापक – 02 व 01 प्राइवेट

विद्यार्थी – कक्षा-05 , कक्षा-05 , कक्षा-04 , कक्षा-07 , कक्षा-08 , कुल-29

जहा पर शिक्षा में गुणवत्ता हेतु 01 प्राइवेट अध्यापक 800 रुपया प्रति माह में रखा है | विद्यार्थियों के घर लगभग 03 किलोमीटर दूर होने के कारण व विद्यार्थियों के आधुनिक विद्यालयों में पलायन को रोकने के लिए विद्यार्थियों के लिए निशुल्क आने जाने के हेतु रिक्से कि व्यवस्था कि गयी है | रिक्सा चालक को मासिक 1500 रुपया दिया जाता है तथा रिक्सा मरम्मत हेतु अलग पैसा दिया जाता है | इस हेतु रिक्सा चालक को 4500 रुपये में नया रिक्सा खरीद कर भी दिया गया है |

इस प्रकार कुल मिलकर विद्यालय के विकास में – प्राइवेट अध्यापक 800 रुपया प्रति माह + रिक्सा चालक को मासिक 1500 रुपया +4500 रुपये में नया रिक्सा +रिक्सा मरम्मत का खर्च श्री नारायण सिंह राना (हैड ) स्वयं अपनी जेब से वहन करते है |

रिक्सा चालक श्री रामी राम जी से जब मेरे द्वारा जाना गया कि विद्यालय के कर्यो में सहयोग देने में आप कितनी ख़ुशी महसूस करते है ? जिस पर रामी राम जी बताते है कि मुझे विद्यार्थियों को स्कूल पहुचाने व छोड़ने के बाद रिक्से से मजदूरी करने कि छूट है पर विद्यालय कार्यो में इतना अच्छा लगता है कि यहीं साफ सफाई आदि व्यवस्था में हथ बटाता हू | जिसमे मुझे बहुत अच्छा लगता है |

Leave a Reply

%d bloggers like this: