व्यंग्य/बुंदु उठ, लीडर बन

0
237

capबुंदु उठ, घराट बंद कर। चुनाव आ गया। खड्ड सूख गई। सिर में हाथ मत दे। परेशान मत हो। घराट का स्यापा मत कर। वोटर ही मत रह। वोटर होकर बहुत जी लिया। अब लीडर बन। कपीन फैंक। लंगोट कस। घराट में क्या रखा है? लीडरी में बहुत कमाई है। चल, पुश्तों की सेफ्टी का कर कुछ जत्न, बुंदु उठ, लीडर बन।

मक्की मत पीस। गेहूं मत पीस। जौ मत पीस। चने मत पीस। धर्मनिरपेक्ष देश में जनता को धर्म का आटा खिला। धर्मनिरपेक्ष देश में जनता को जात का बेसन खिला। शुध्द आटा मत दे। आटे में बेईमानी मिला। बेसन में मक्कारी मिला। सत्तू मत खिला। सत्तू आत्मा को पवित्र रखते हैं। पवित्र आत्मा भूखी मरती है। चल बेचते हैं मुर्दों का कफन, बुंदु उठ, लीडर बन।

विधान सभा जा। राज्य सभा जा। संसद जा। जूते चला। चप्पलें चला। जनता को भूखे रख। अपने भत्ते बढ़ा। आटा महंगा कर। चावल महंगा कर। पूंजीपतियों से मिल। समाजवाद की स्थापना कर। जनहित बेच। कोठे पर लेट। लिपस्टिक सस्ती कर। पाउडर सस्ता कर। नमक पर टैक्स लगा। हल्दी पर टैक्स लगा। लोकतन्त्र के मंच पर नंग -धडंग़ हो मना जश्न, बुंदु उठ, लीडर बन।

पीसाई मत ले। आज तक ली, क्या बना? अब जनता को पीस। मजा आएगा,बहुत मजा आएगा। रोना छोड़। धोना छोड़। शरीफी छोड़। ईमानदारी छोड़। अफवाहें फैला। अफवाहें मत सुन। निक्कमा हो। बेईमानी कर, बेईमानी देख। उल्लू मत बन। उल्लू बना। अपना मुंह काला मत करवा। ईमानदारों का मुंह काला कर। चरित्रहीन हो मना जश्न,बुंदु उठ,लीडर बन।

मक्की मत साफ कर। दलाली कर। दलाली खा। घराट में मत बैठ। दंगे में शामिल हो। समय की कद्र मत कर। आदर्श नागरिक बन। केवल अधिकारों की पैरवी कर।र् कत्तव्य को छोड़ जूते मार। अधिकार प्रेमियों का अपना वतन, बुंदु उठ, लीडर बन।

किसीसे भी सच बोल मत। यहां सच बोलना पाप है। तिलक लगा। धर्म की आड़ ले। समाज में धर्म के नाम पर दंगे करवा। डट कर पाप कर। किसी से मत डर। मन्दिर जा, पाप धो आ। गुरू़द्वारे जा, पाप धो आ। चर्च जा, पाप धो आ। धर्म के नाम पर नौटंकी कर। नौटंकी लीडरी के लिए परम जरुरी है। कर्मशील बन। कर्म से भाग। फल की इच्छा रख। कामप्रिय बन। सलाम की खा। किसी से मत डर। सबको डरा। मेहनतकशों से नफरत कर। मेहनत कर खाना बुरी आदत है। मेहनत करने वाले भूखे मरते हैं। लोकतन्त्र में राजा बन, महाराजा बन। पर जनसेवक मत बन। मन्त्री बन,सन्तरी बन। पर देश भक्त मत बन। देश चला,खुद सो जा। रामभरोसे चल रहा अपना वतन, बुंदु उठ, लीडर बन।

अपनी लीडरी की धार चमका। व्यभिचार को पूजा मान। नित नई पूजा कर। कबूतरबाज हो जा। प्रेम का भक्त होने का नाटक कर। दिमाग में नफरत के बीहड़ उगा। घराटन को घर से भगा। प्रेमिका को घर शान से ले आ। पराए माल को अपने बाप का माल समझ। इस देश का तू अनमोल रत्न,बुंदु उठ,लीडर बन।

शान से तस्करी कर। छोटी-मोटी तस्करी लीडर को लानत है। अन्तरराष्ट्रीय तस्कर बन। नाम कमा। नाक कटा। नकटा प्रिय लीडर कहलाता है। प्रिय लीडर बन। डर मत, तू एम एल ए है। तू एम पी है। घोटालों के साथ उठ -बैठ। घोटालों में तेरे प्राण बसते हैं। जनता को गोली मार। वह फुद्दू है। नैतिकता को कर कब्र में दफन, बुंदु उठ, लीडर बन।

न्याय की बात कर। सरकारी जमीन मार। सबका मांस खा। सबके हक मार। पर सबके हकों की पैरवी कर। शैतान बन। अन्याय मत सह। अन्याय कर। तेरे कारनामों से चीत्कार कर उठे देश का कण-कण, बुंदु उठ,लीडर बन।

पंजीकृत लीडर हो जा। देश के स्वर्णिम पन्नों में अपना नाम लिखवा। देश के विनाश में अपना अमूल्य योगदान दे। मुख्यधारा से जुड़। गरीबी को नहीं, गरीबों को खत्म कर। बीमार होने का ढोंग कर। बीमारी के बहाने विदेशों में घूम आ। यहां के अस्पताल गधों के लिए हैं। हक से जनता के लिए नकली दवा बनवा। डट कर मौत में कमीशन खा। चोर बाजारी के लिए कर अनशन, बुंदु उठ, लीडर बन।

मन में नीम रख। सबसे मीठा बोल। सबके गले मिल। सबकी पीठ में छुरा घोंप। सबसे हंस कर मिल। सबसे खुंदक रख। सबको भरोसा दे। किसी पर भरोसा मत कर। मंझधार में भरोसा दे डूबा। खुद किनारे बैठ तालियां बजा। मल्लहार गा। भगवान से मत डर। बहादुर बन। बीसियों लोन मार। टैक्स चोर। हर विभाग को अपने बाप की प्रापर्टी मान। डाकुओं को गले लगा। देशहित में अपना गिरोह बना। सबको झांसा दे। पर सपने में भी धोखा मत खा। बुरा ही देख। बुरा ही सुन। बुरा ही बोल। बुरा ही सोच। बुरा मत बन। अच्छाई से नफरत कर। भाई भतीजावाद का समर्थक बन। हवा में रह। जमीन पर मत चल। सड़ी मानसिकता रख। आदर्शवादी होने का ढोंग कर। गुंडागर्दी को कर समर्पित अपना तन -मन, बुंदु उठ,लीडर बन।

धर्म-धर्म रट। लाखों खट्ट। अत्याचार सहन मत कर। अत्याचारी बन। बीमारी बन। महामारी बन। भजन कर। गबन कर। अखबारों की सुर्खियां बन। सभ्रांत हो जा, चौड़ी छाती तन, बुंदु उठ, लीडर बन।

विधान सभा जा। राज्य सभा जा। संसद जा। जूते चला। चप्पलें चला। जनता को भूखे रख। अपने भत्ते बढ़ा। आटा महंगा कर। चावल महंगा कर। पूंजीपतियों से मिल। समाजवाद की स्थापना कर। जनहित बेच। कोठे पर लेट। लिपस्टिक सस्ती कर। पाउडर सस्ता कर। नमक पर टैक्स लगा। हल्दी पर टैक्स लगा। लोकतन्त्र के मंच पर नंग -धडंग़ हो मना जश्न, बुंदु उठ, लीडर बन।

ये देश हमाम है। तू देश की अमर सन्तान है। देश के हित बेच। देश बेच। नंगा नाच। नंगा खा। देश नंगों का है। इसी में तेरी भलाई है। इसी में छिपी मलाई है। छाछ जनता में बांट। खुद मक्खन चाट। तू स्वतन्त्र देश का लाट। तुझे करेंगे ऋषि मुनि नमन्! बुंदु उठ,लीडर बन।

बुंदु! आलस त्याग,चुनाव जीत। सत्य -निष्ठा की शपथ खा। शुरु हो जा। विरोधियों को पटा,कुर्सी बचा। चल विदेशी बैंकों के नाम गिन, बुंदु उठ,लीडर बन।

-अशोक गौतम
अपर सेरी रोड, गौतम निवास,सोलन हि प्र
E mail-A_gautamindia@rediffmail.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

17,183 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress