अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

रियाद में ट्रंप का शीर्षासन

रात्रि-भोज के पहले वे महल में नाचे भी। यह सब नाटक क्यों किया, ट्रंप ने ? क्योंकि सउदी अरब के साथ 350 अरब डालर के रक्षा-समझौते और 200 बिलियन के व्यापारिक समझौते हुए हैं। किसी छोटे-मोटे देश का सालाना बजट इतना बड़ा होता है। अमेरिका की थकी-मांदी अर्थ-व्यवस्था के लिए ये समझौते छोटे-मोटे सहारा बनेंगे। उधर सउदी अरब की जमकर तेल-मालिश भी हुई। ट्रंप ने बेवजह ईरान को कोसा। उसे आतंकवादी बताया। बादशाह सलमान के सुर में सुर मिलाया। ट्रंप शायद भूल गए कि ईरान में हसन रुहानी दुबारा राष्ट्रपति बन गए हैं। वे नरमपंथी हैं और अमेरिका से ईरान के संबंधों को सुधारना चाहते हैं। ट्रंप के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने उनको शुभकामना देने की बजाय उपदेश झाड़ा कि रुहानी अपना प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम बंद करें और आतंकवाद को बढ़ावा न दें।

तभी सबसे आगे होंगे हिदुस्तानी

पिछले दिनों जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम की समीक्षा करने के कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किये, तो इससे भारतीय आईटी कंपनियों में कोई खास अफरातफरी नहीं मची. उसका एक कारण ये भी है कि फिलहाल नियम जस के तस हैं. लेकिन यह भी सच है ही कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान की तरह ट्रंप की बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकननीति का भविष्य में भारतीयों के लिए अमेरिका में शिक्षा और रोजगार के अवसर काफी कम कर सकती है.