अज़ान

अज़ान पर फिजूल की बहस

क्या लाउडस्पीकर पर जोर-जोर से चिल्लाना इस्लाम है? इस्लाम का जन्म हुआ तब कौन से लाउडस्पीकर चल रहे थे? सच्ची प्रार्थना तो वहीं है, जो मन ही मन की जाती है। ईश्वर या अल्लाह बहरा नहीं है कि उसे कानफोड़ू आवाज़ में सुनाया जाए। शायद इसलिए कबीर ने कहा हैः
कांकर-पाथर जोड़ि के मस्जिद लई चुनाय।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, बहरा हुआ खुदाय।।