लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-19 December 17, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य गीता का तीसरा अध्याय और विश्व समाज सन्त का यह कार्य आपको शिक्षा दे रहा है कि यज्ञीय बन जाओ, जो भी कुछ मिलता है-उसे बांट दो। ज्ञान को भी बांट दो और मिले हुए दान को भी बांट दो। चोर, डकैती या लुटेरा व्यक्ति ऐसा क्यों नहीं कर पाता? इसका कारण […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta आज का विश्व कर्मयोग गीता गीता का कर्मयोग गीता का तीसरा अध्याय विश्व समाज
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-18 December 14, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  गीता का तीसरा अध्याय और विश्व समाज यहां श्रीकृष्णजी अर्जुन को पुन: उसके धर्म का स्मरण करा रहे हैं कि तू स्वधर्म को पहचान और उसी के अनुसार आचरण कर, अर्थात कर्म कर। यदि तू यह मान रहा है कि कर्म करना ही नहीं है अर्थात स्वधर्म का पालन करना ही […] Read more » Featured आज का विश्व कर्मयोग गीता गीता का कर्मयोग
लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-16 December 9, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य गीता के दूसरे अध्याय का सार और संसार गीता यह भी स्पष्ट करती है कि ”हे कौन्तेय! पुरूष चाहे कितना ही यत्न करे, कितना ही विवेकशील हो-ये मथ डालने वाली इन्द्रियां बल पूर्वक मन को विषयों की ओर खींच लेती हैं। मन विषयों के पीछे भागता है और इस प्रकार भागता हुआ […] Read more » Featured आज का विश्व कर्मयोग गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-4 November 18, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वैदिक गीता-सार सत्य डा. देसाई को अपने लक्ष्य की खोज थी और वह अपने लक्ष्य पर पहुंच भी गये थे, परन्तु अभी वास्तविक लक्ष्य (पण्डा और राजा से मिलना) कुछ दूर था। उन्होंने अपने साथ एक मुसलमान पथप्रदर्शक रख लिया था। यह पथप्रदर्शक वहां के लोगों को यह भी बताता जा रहा था कि देखो […] Read more » Featured karmayoga of geeta आज का विश्व कर्मयोग गीता गीता का कर्मयोग
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-1 November 13, 2017 / November 14, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   वैदिक गीता-सार सत्य कभी-कभी मन में आता है कि वह समय कितना पवित्र और प्यारा होगा, जब भगवान श्री कृष्ण जी इस भूमण्डल पर विचरते होंगे? पर अगले ही क्षण मन में यह विचार भी आता है कि उस काल को भी पवित्र और प्यारा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि […] Read more » Featured आज का विश्व कर्मयोग गीता का कर्मयोग