अचानक उष्ण धार जब छोड़े !

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अचानक उष्ण धार जब छोड़े, ध्यान में मुझको वे रहे जोड़े; गीले आवरण देख नेत्र मुड़े, इससे उद्विग्न वे हुए थोड़े ! बनाई मुद्रा मुख की कुछ अद्भुत, अजीव भोंह से किए फ़ितरत; सात्विकी राग था उन्हें आया, स्वरूप उनका मधुर मन भाया ! भाव ब्राह्मी में लगे अति अप्रतिम, कृपामय झाँकते थे अन्तर्तम; चाहते… Read more »