नेताओ का राज

नेताओ का राज , फिर कैसे आएगा इंडिया का स्वराज

वहीँ भूषण के ऑफिस में घुसकर कुछ लोगो ने जूतों से उनकी पिटाई कर दी थी। वैसे इन घटनाओ की निंदा की जानी चाहिए। मैंने भी इन घटनाओ की निंदा की थी , हालांकि मैं कड़ी निंदा नहीं कर पाया था ,क्योंकि निंदा करने से पहले मैंने मिठाई खा ली थी क्योंकि जैसे ही मैंनै इन घटनाओ के बारे में सुना, वैसे ही मेरे दिल में ख्याल आया, “कुछ मीठा हो जाए”।