प्रेम

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-बीनू भटनागर- प्रेम इतना भी न करो किसी से, कि दम उसका ही घुटने लगे, फ़ासले तो हों कभी, जो मन मिलन को मचलने लगे। भले ही उपहार न दो, प्रेम को बंधन भी न दो, एक खुला आकाश दे दो, ऊंची उड़ान भरने का, सौभाग्य दे दो… लौट के आयेगा तुम्हारे पास ही, ये… Read more »

पाँच प्रेम कविताएँ

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1 इंतजार मैं तो भेजता रहूँगा हमेशा उसको ‘ढाई आखर’ से पगे खत अपने पीड़ादायक क्षणों से कुछ पल चुराकर उन्हें कलमबद्ध करता ही रहूँगा कविताओं और कहानियों में मैं सहेज कर रखूँगा सर्वदा उन पलों को जब आखिरी बार उसने अपने पूरेपन से समेट लिया था अपने में मुझे और दूर कहीं हमारे मिलन… Read more »