पाँच प्रेम कविताएँ

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1 इंतजार मैं तो भेजता रहूँगा हमेशा उसको ‘ढाई आखर’ से पगे खत अपने पीड़ादायक क्षणों से कुछ पल चुराकर उन्हें कलमबद्ध करता ही रहूँगा कविताओं और कहानियों में मैं सहेज कर रखूँगा सर्वदा उन पलों को जब आखिरी बार उसने अपने पूरेपन से समेट लिया था अपने में मुझे और दूर कहीं हमारे मिलन… Read more »