मैथिलीशरण गुप्त सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय कवि थे

Posted On by & filed under विविधा, शख्सियत, समाज

मैथिलीशरण गुप्त जयन्ती, 3 अगस्त 2017 के उपलक्ष्य में   ललित गर्ग ”पर्वतों की ढलान पर हल्का हरा और गहरा हरा रंग एक-दूसरे से मिले बिना फैले पड़े हैं….।“ कैसा सही वर्णन किया है किसी साहित्यकार ने। लगता है कि हमारे मन की बात को किसी ने शब्द दे दिये। ठीक इसी प्रकार अगर हम… Read more »