हिन्दी का सामर्थ्य , यह बाजार की भाषा है

Posted On by & filed under विविधा, हिंदी दिवस

डॉ. मयंक चतुर्वेदी बाजार में हर चीज बिकती है, यहाँ तक कि हवा, पानी, मिट्टि से लेकर हर वह चीज जिसे किसी न किसी रूप में बेचा जा सके, और जो बिकने लायक न भी हो, लेकिन बाजारवादी सिद्धांत कहता है कि उसकी भी कुछ न कुछ कीमत अवश्य होती है, ऐसे में जो उस… Read more »