राजग बंधन की खुलती गांठें – सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र”

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कहते हैं कि सियासत में दोस्ती और दुश्मोनी कुछ भी स्थायी नहीं होती । बात चाहे समर्थन की हो या गठबंधन की सियासत में सब मतलब के यार होते हैं । भारतीय राजनीति की विषम परिस्थितियां कई बार इस जुमले को सत्यन सिद्ध कर चुकी हैं । इस परिप्रेक्ष्य में अगर भाजपानीत राजग गठबंधन को… Read more »