चाणक्य की दृष्टि और राजधर्म निभाने की भारतीय परंपरा

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-कन्हैया झा- पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं पर स्याही फेंकना, मुंह पर थप्पड़ मारने आदि जैसी घटनाएं भी हुई. जिस पर सोशल नेटवर्किंग फेसबुक, ट्विटर आदि पर अनेक लोगों ने नेताओं की खिल्ली भी उड़ाई. आम चुनाव असभ्य जनता के लिए खिलवाड़ हो सकते हैं लेकिन भारत जैसे प्राचीन सभ्यता वाले… Read more »

राजधर्म से बड़ा है बौद्धिकधर्म

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जगदीश्‍वर चतुर्वेदी बुद्धिजीवी सत्य भक्त होता है। राष्ट्र,राष्ट्रीयता, दल,विचारधारा आदि का भक्त नहीं होता। सत्य के प्रति आग्रह उसे ज्यादा से ज्यादा मानवीय और संवेदनशील बनाता है। सत्य और मानवता की द्वंद्वात्मक प्रक्रिया में तपकर ही बुद्धिजीवी अपने सामाजिक अनुभवों को सृजित करता है। कालजयी रचनाएं दे पाता है। जनता के बृहत्तर तबकों की सेवा… Read more »