कविता
बिन अपराधी श्रवण का, छीना जीवन-सार॥
/ by डॉ. सत्यवान सौरभ
एक घुटी-सी चीख है, सरयू तट की बात।बिन अपराधी श्रवण को, मार गया सम्राट॥राजमुकुट के तीर ने, कैसा किया प्रहार।बिन अपराधी श्रवण का, छीना जीवन-सार॥ सरयू रोई मौन हो, काँपा सारा घाट।करुण पुकारें गूँजतीं, सुनता रहा प्रभात॥सेवा के उस पुण्य पर, टूटा कैसा वार—बिन अपराधी श्रवण का, छीना जीवन-सार॥राजमुकुट के तीर ने, कैसा किया प्रहार।बिन […]
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