टॉप स्टोरी विविधा कंवल के मनिन्द खिला तेरा चेहरा देखा July 8, 2009 / December 27, 2011 by कनिष्क कश्यप | 2 Comments on कंवल के मनिन्द खिला तेरा चेहरा देखा गुबार भरे राहों में खुस्क फ़िज़ा की बाहों में कंवल के मनिन्द खिला तेरा चेहरा देखा गुनचों में उलझी लटें हवा के इशारे पर आंखो पे झुक पलकों मे उलझ चेहरे पर बिखर रहीं खाक की आंधी में इक महज़बी देखा बलिस्ते भर थी दूरियाँ धड़कने करीब थीं सांसो की महक होठों की चमक चांदनी […] Read more » Manind khila मनिन्द खिला