कविता मुखर हुआ विश्वास July 2, 2026 / July 2, 2026 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment मौन अधर पर था कभी, नयनों में थी पीर। अब स्वर बने बोलती, बदली खुद तक़दीर॥ Read more » मुखर हुआ विश्वास