कविता
हर प्रभात कहता
/ by प्रियंका सौरभ
क्षितिज सुनाता रोज़ ही, आशा का संदेश।हर प्रभात कहता उठो, जीवन परम विशेष॥ सूरज चुपके से रचे, नव उजियारा-गान।रातों के हर दर्द का, करता है अवसान॥ लहर-लहर सागर कहे, छोड़ो बीता काल।आगे बढ़ना ही सदा, जीवन की है चाल॥ लाली ओढ़े व्योम ने, लिखा नया अध्याय।अँधियारे के अश्रु से, जन्मा नव पर्याय॥ रेतों के पदचिह्न […]
Read more »