बज्रयानी सिद्ध आदि कवि सहरपाद का जन्म सहरसा में – मुक्तेश्वर मुकेश

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जब बौद्ध धर्म 8वीं शताब्दी में बज्रयान के रूप में विकसित हुआ तब धीरे-धीरे इसमें तंत्रयान का समा वेश हो गया। तंत्रयान में बौद्ध भिक्षुणियाँ गुह्य गुफा में तांत्रिक क्रिया में रहने लगे। उस समय जनमानस में अपने दैहिक रोग मुक्ति के लिए तंत्रयानी भिक्षुकों का सहारा लेना अनिवार्य दिखने लगा। वे लोग तांत्रिक होम… Read more »