कोर्ट-मीडिया न हों तो पुलिस जीना मुश्किल कर देगी !

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इक़बाल हिंदुस्तानी पुलिस दमन पर सभी दलों की सरकारें एक सी क्यों हो जाती हैं ? 4 जून 2011 को रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे योगगुरू बाबा रामदेव के समर्थकों के खिलाफ आधी रात को हुई पुलिस कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनतंत्र विरोधी करार दिया जाना एक सुखद पहल माना… Read more »

परीक्षण के दौर से गुजरती न्यायपालिका

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अनिल त्यागी देश की अदालतें जो अभी तक अखबारी खबरों से दूर रहती थी आज कल मीडिया की सुर्खियों में है। माननीय न्यायधीश एक दूसरे पर लगभग आरोप लगाने के करीब है। मद्रास उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश के एक पत्र को लेकर सवाल उछाले जा रहे हैं। जस्टिस एच.एम. गोखले ने खुल कर… Read more »

भारत में न्याय पाने का सफर आसान नहीं

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ठीक ही कहा गया कि न्याय मिलने में अगर देरी होती है तो वह न्याय नहीं मिलने के समान है। स्वस्थलोकतंत्र की पहचान स्वस्थ न्यायपालिका को माना जाता है, लेकिन हमारे देश की न्याय व्यवस्था इतनी लचर है कि दो-तीन पीढ़ियाँ गुजर जाती हैं, फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाता है। कायदे से बदतर… Read more »