भारत के लिये जिये जयानन्द भारती- शाक्त ध्यानी

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सन् 1857 के संग्राम में सदियों से सोया भारत जैसे जाग उठा था। इस संग्राम की भूमिका बांधने वाले अनेक विचारक, संत, कवि जिस तरह वर्षों से भारतीय समाज को खटखटाते रहे। उसी का परिणाम था कि साढे तीन लाख भारतीयों ने अपनी स्वतन्त्रता के लिए आत्मोत्सर्ग किया। अंग्रेज शासक इस दमन के अन्दर सुलगती… Read more »