बाजार और बिकनी के चंगुल में गीतकार और संगीतकार

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गीत-संगीत अर्थात सुरो का सागर, जो मन की गहराईयों में पहुचकर शरीर के अंदर छीपे सुक्ष्म कोशिकाओं को तरंगीत कर उसे उर्जान्वित करने का काम करती है। संगीत भारत के लिए कोई नई अवधरणा नहीं है