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यह न्यायिक आपातकाल क्यों?

पता नहीं, वह उनसे इतना डरा हुआ क्यों है? एक माह बाद वे सेवा-निवृत्त होने वाले थे। वे हो जाते। मामला खत्म होता लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आप को दलदल में फंसा लिया है। उसका यह आदेश तो बिल्कुल भी मानने लायक नहीं है कि अखबार और टीवी चैनल कर्णन का कोई भी बयान प्रकाशित न करें। कर्णन का न करें और उनका करें, यह क्या मजाक है? क्या यह न्यायिक आपात्काल नहीं है?