Supreme Court

यह न्यायिक आपातकाल क्यों?

पता नहीं, वह उनसे इतना डरा हुआ क्यों है? एक माह बाद वे सेवा-निवृत्त होने वाले थे। वे हो जाते। मामला खत्म होता लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आप को दलदल में फंसा लिया है। उसका यह आदेश तो बिल्कुल भी मानने लायक नहीं है कि अखबार और टीवी चैनल कर्णन का कोई भी बयान प्रकाशित न करें। कर्णन का न करें और उनका करें, यह क्या मजाक है? क्या यह न्यायिक आपात्काल नहीं है?

बड़ी अदालत में बड़ा अन्याय

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में आप किसी भी भारतीय भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते। हिंदी का भी नहीं। हिंदी राजभाषा है। यह हिंदी और राज दोनों का मजाक है। यदि आप संसद में भारतीय भाषाओं का प्रयोग कर सकते हैं तो सबसे बड़ी अदालत में क्यों नहीं? सबसे बड़ी अदालत में सबसे बड़ा अन्याय है, यह ! देश के सिर्फ चार उच्च न्यायालयों में हिंदी का प्रयोग हो सकता है- राजस्थान, उप्र, मप्र और बिहार! छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु ने भी स्वभाषा के प्रयोग की मांग कर रखी है।