यह न्यायिक आपातकाल क्यों?

Posted On by & filed under विधि-कानून, विविधा

पता नहीं, वह उनसे इतना डरा हुआ क्यों है? एक माह बाद वे सेवा-निवृत्त होने वाले थे। वे हो जाते। मामला खत्म होता लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आप को दलदल में फंसा लिया है। उसका यह आदेश तो बिल्कुल भी मानने लायक नहीं है कि अखबार और टीवी चैनल कर्णन का कोई भी बयान प्रकाशित न करें। कर्णन का न करें और उनका करें, यह क्या मजाक है? क्या यह न्यायिक आपात्काल नहीं है?

निर्भया और बिल्किस बानो

Posted On by & filed under विधि-कानून, विविधा

निर्भया के बलात्कार और हत्या करने वाले चार अपराधियों को आज सर्वोच्च न्यायालय मृत्यु-दंड नहीं देता तो भारत में न्याय की मृत्यु हो जाती। निर्भया कांड ने दिसंबर 2012 में देश का दिल जैसे दहलाया था, उसे देखते हुए ही 2013 में मृत्युदंड का कानून (धारा 376ए) पास हुआ था। छह अपराधियों में से एक… Read more »

बड़ी अदालत में बड़ा अन्याय

Posted On by & filed under विधि-कानून, विविधा

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में आप किसी भी भारतीय भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते। हिंदी का भी नहीं। हिंदी राजभाषा है। यह हिंदी और राज दोनों का मजाक है। यदि आप संसद में भारतीय भाषाओं का प्रयोग कर सकते हैं तो सबसे बड़ी अदालत में क्यों नहीं? सबसे बड़ी अदालत में सबसे बड़ा अन्याय है, यह ! देश के सिर्फ चार उच्च न्यायालयों में हिंदी का प्रयोग हो सकता है- राजस्थान, उप्र, मप्र और बिहार! छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु ने भी स्वभाषा के प्रयोग की मांग कर रखी है।

शीर्ष न्यायालय और गरीबी रेखा

Posted On by & filed under आर्थिकी

प्रमोद भार्गव देश के गरीबी रेखा की खिल्ली उड़ाने के साथ योजना आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय की भी खिल्ली उड़ार्इ है। क्योंकि इसी न्यायालय ने दिशा-निर्देश दिए थे कि गरीबी रेखा इस तरह से तय की जाए कि वह यथार्थ के निकट हो। इसके बावजूद आयोग ने देश की शीर्ष न्यायालय को भी आर्इना दिखा… Read more »

ग्राहम स्टेन्स और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मायने

Posted On by & filed under विधि-कानून

आर.एल.फ्रांसिस जस्टिस नियोगी की रिर्पोट को हम नहीं मानते, धर्मांतरण विरोधी कानून हमारी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला हैं। डीपी वाधवा आयोग की रिर्पोट झूठ बोलती है। कंधमाल में हुए साप्रदायिक दंगों के बाद बनाए गए जस्टिस एससी मोहपात्रा आयोग की रिर्पोट दक्षिणपंथी संगठनों के प्रभाव में बनाई गई लगती है इसलिए यह विचार करने योग्य… Read more »

सुप्रीम कोर्ट बनाम लोकतंत्र

Posted On by & filed under राजनीति

एक तरफ तो साल दर साल हम गणतंत्र दिवस मनाते हुए बड़े गर्व से कहते हैं कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नागरिक है, और दूसरी ओर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचाने की कोशिश ढके-छुपे तौर पर जारी रहती है। हमारे देश में ”लोगों द्वारा… Read more »

सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक टिप्पणी

Posted On by & filed under विधि-कानून

पहली पत्नी के रहते कोई भी सरकारी कर्मचारी दूसरा विवाह नहीं कर सकता सुप्रीम कोर्ट की उस ऐतिहासिक टिप्पणी से मुस्लिम महिलाओं को काफ़ी राहत मिलेगी, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि पहली पत्नी के रहते कोई भी सरकारी कर्मचारी दूसरा विवाह नहीं कर सकता. दरअसल, कोर्ट ने राजस्थान सरकार के उस फ़ैसले को सही… Read more »

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों ने की संपत्ति की घोषणा

Posted On by & filed under प्रवक्ता न्यूज़

नई दिल्ली, दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले पर अमल करते हुए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों ने आज अपनी-अपनी संपत्ति की घोषणा कर दी। प्रधान न्यायाधीश केजी.बालाकृष्णन ने लगभग 18 लाख रुपए की संपत्ति का ब्योरा दिया है। न्यायाधीशों की संपत्ति का ब्योरा उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर जारी किया गया है। इन न्यायाधीशों ने… Read more »

सुप्रीम कोर्ट ने दिया घारा 377 पर सरकार को नोटिस

Posted On by & filed under प्रवक्ता न्यूज़, विधि-कानून

समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं मानने के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने केंद्र व दिल्ली सरकार के साथ-साथ गैर सरकारी संगठन नाज फाउंडेशन को गुरुवार को नोटिस जारी किया है। पिछले दिनों दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस बाबत अपना फैसला सुनाया था, जिससे देश में एक… Read more »

सर्वोच्च न्यायालय ने दिया मोदी के खिलाफ जांच का आदेश

Posted On by & filed under राजनीति

देश की सर्वोच्च अदालत ने वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के मामले में राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 62 अन्य लोगों के खिलाफ जांच के आदेश दिए। इसमें उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों समेत कई पुलिस अधिकारी व नौकरशाह शामिल हैं। इससे दंगे का भूत लोकसभा चुनाव के मध्य फिर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)… Read more »