भिखारी भी तुम, लुटेरे भी तुम – ज़रा नहीं किसी से कम

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 अविनाश वाचस्परति  वे अपने वोटरों को भिखारी कह रहे हैं। यह जानते हुए भी कि उनका गुजारा वोटरों के वोटों के बिना नहीं होने वाला हे और वोट मांगने की चाहत में वे उनकी गरीब कुटिया में कई बार खाना खाने का ड्रामा कर चुके हैं। जबकि असली भिखारी तो यह खुद ही हैं। खाना… Read more »