कविता कुछ कविताये….खुशबू सिंह December 31, 2011 / December 31, 2011 by खुशबू सिंह | 2 Comments on कुछ कविताये….खुशबू सिंह खुशबू सिंह 1. बैरी अस्तित्व मिटा गया .. निज आवास में घुस बैरी अस्तित्व मिटा गया आवासीय चोकिदारों को धूली चटा गया … सुशांत सयुंक्त परिवार में बन मेहमान ठहरे थे वे कुटिल!! मित्रता के नाम पर यूँ बरपाया कहर की सयुंक्त की सारी सयुंक्ता ही मिटा गया जाने किस-किस के नाम पर सबको […] Read more » Poems politics कुछ कविताये