पर्यावरण लेख पलाश की सिंदूरी आभा : फागुन का दहकता दर्पण, जिसमें झांकती है हमारी परंपरा February 27, 2026 / February 27, 2026 by उमेश कुमार साहू | Leave a Comment उमेश कुमार साहू जब फागुन की बयार चलती है तो प्रकृति मानो अपना मौन तोड़कर रंगों की भाषा में बात करने लगती है। इस संवाद का सबसे प्रखर और दीप्तिमान शब्द है – पलाश। जिसे हम लोकभाषा में ‘टेसू’ या ‘ढाक’ भी कहते हैं। पलाश मात्र एक वृक्ष नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की उस अदम्य जिजीविषा का प्रतीक […] Read more » पलाश की सिंदूरी आभा