लेखक परिचय

अब्दुल रशीद

अब्दुल रशीद

सिंगरौली मध्य प्रदेश। सच को कलमबंद कर पेश करना ही मेरे पत्रकारिता का मकसद है। मुझे भारतीय होने का गुमान है और यही मेरी पहचान है।

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हादसों में शिकार मासूम जिन्दगी कि मौत पर गैर जिम्मेदाराना राजनीति और खबरों के नाम पर भावनाओं के साथ मीडिया द्वारा बलात्कार करना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं ।

रेल हादसा के बाद होने वाली मौत पर

सरकार – मौत के सन्नटे को चीरता सरकारी घोषणा मौत के लिए मुआवज़ा देना, मानो हादसे में मरने वाले परिवार को मौत कि कीमत दिया जा रहा हो और घायलों के परिवार को क्षतिग्रस्त अंग कि कीमत । और तो और नए नए बने रेल मन्त्री महोदय ने बिना समय गंवाए तुरंत घोषणा कि और मौत कि कीमत तय कर दी एक सरकारी नौकरी । शायद यही जिम्मेदारी है सरकार कि आम जनता के लिए। नाकामी छुपाने की मजबूरी है भाई ।

मीडिया – आम जनता कि आवाज का दावा करने वाली मीडिया में तो मैराथन दौर लगा था के सबसे तेज है हम और लगे आँकड़े बटोरने में के कितने लोगो की मौत हुई और कितने लोग घायल हुए । टी आर पी बढाने की मजबूरी है भाई ।

विपक्ष – विपक्ष ने तो मानो एक बात रट ली है इस्तीफ़ा दो मानो सभी समस्या का एक मात्र हल है इस्तीफ़ा। सरकार गिराने की मजबूरी है भाई ।

कोई इस प्रश्न को क्यों नही उठाता है कि आखिर हादसे का जिम्मेदार है कौन?जब एक मौत कि सजा फांसी है तो हादसे में होने वाली मौत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति कि सजा क्यों नहि तय कि जाती ताकि सबक हो गैरजिम्मेदाराना नज़रिया रखने वाले भ्रष्ट तन्त्र के रखवालों के लिए।

इतने संवेदनाहीन हो गए हैं कि मां कि गोद, मांग के सुहाग और ऐसी हि नायाब रिस्तो के साथ बंधी मानवीय संवेदना मुआवज़ा दे कर खरीदना चाहते हैं ।

मुम्बई

शाम 6:55 तारीख 13/07/2011 खबर आई मुम्बई फिर दहला मुम्बई में सीरियल बम बलास्ट। एक बार फिर दानव का ताण्ड्व हुआ और मासूम जिंदगी को शिकार बना लिया गया,और शुरू हो गया सरकार विपक्ष व मीडिया का राग आलापना । किसी को आम जन्ता पर क्रूरतापूर्वक हुए प्रहार से कोई सरोकार नहीं बस सभी लोग ढोल पीट कर अपने को जिम्मेदार साबित करने व आम जन्ता को बेवकूफ बनाने में अपनी सारी ताकत लगा रहे हैं ।

सरकार कि नैतिक जिम्मेंदारी बनती है आम जनता कि सुरक्षा लेकिन आम जनता से ज्यादा सरकार का ध्यान उस आतंकवादी कसाब कि सुरक्षा पर है जिसने मौत का नंगा नाच किया है और अब सरकारी मेहमान बना है।

क्यों सरकार कि नजर में आम जनता कि सुरक्षा से ज्यादा कसाब कि सुरक्षा अहमियत रखता है?

क्यों नहीं सरेआम कसाब को फांसी दे दी जाती, क्यों आम जनता कि गाढी कमाई उसके उपर लुटा रही है सरकार?

अगर ज़रा सा भी इन्सानियत बची है कांग्रेस सरकार में तो इस तरह कि वोट बैंक की राजनीति बंद कर

दे।

बे लाग लपेट

जो भारत के अमन,चैन,व खुशहाली में भागीदार नही बनना चाहता। जिनके ह्रदय में भारत मां की मुहब्बत नही उनके लिए बेहतर है भारत छोड़ दें ।

 

One Response to “बलि दो नौकरी लो – सरकारी बाबा”

  1. Satyarthi

    आपने दिग्विजय सिंह का बयान पढ़ा की नहीं . पकड़ो इन सब हिंदुत्व वालों को और फांसी पर लटका दो. सब से अधिक कारगर यही एक उपाय है

    Reply

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