लेखक परिचय

सुरेश चिपलूनकर

सुरेश चिपलूनकर

लेखक चर्चित ब्‍लॉगर एवं सुप्रसिद्ध राष्‍ट्रवादी लेखक हैं।

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सुरेश चिपलूनकर

जैसा कि सभी को ज्ञात हो चुका है कि केरल के सुप्रसिद्ध सबरीमाला अय्यप्पा स्वामी मन्दिर की पहाड़ियों में भगदड़ से 100 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हुई है जबकि कई घायल हुए एवं अब भी कुछ लोग लापता हैं। इस दुर्घटना को प्रधानमंत्री ने “राष्ट्रीय शोक” घोषित किया, एवं कर्नाटक सरकार के दो मंत्रियों द्वारा अपने दल-बल के साथ घटनास्थल पर जाकर मदद-सहायता की। समूचे केरल सहित तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश व कर्नाटक में शोक की लहर है (मरने वालों में से अधिकतर तमिलनाडु व कर्नाटक के श्रद्धालु हैं)…

लेकिन इतना सब हो चुकने के बावजूद कांग्रेस के “युवा”(??) महासचिव एवं भारत के आगामी प्रधानमंत्री (जैसा कि चाटुकार कांग्रेसी उन्हें प्रचारित करते हैं), दुर्घटनास्थल से मात्र 70 किमी दूरी पर कुमाराकोम में केरल के बैकवाटर में एक बोट में पार्टी मना रहे थे। जिस समय “सेवा भारती” एवं “अय्यप्पा सेवा संगम” के कार्यकर्ता सारी राजनैतिक सीमाएं तोड़कर घायलों एवं मृतकों की सेवा में लगे थे, सेना के जवानों की मदद कर रहे थे, जंगल के अंधेरे को दूर करने के लिये अपने-अपने उपलब्ध साधन झोंक रहे थे… उस समय भोंदू युवराज कुमारकोम में मछली-परांठे व बाँसुरी की धुन का आनन्द उठा रहे थे।

यह भीषण भगदड़ शुक्रवार यानी मकर संक्रान्ति के दिन हुई, लेकिन राहुल बाबा ने शनिवार को इदुक्की जिले में न सिर्फ़ एक विवाह समारोह में भाग लिया, बल्कि रविवार तक वे कुमारकोम के रिसोर्ट में “रिलैक्स”(?) कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि राहुल गाँधी अलप्पुझा में अपने पारिवारिक मित्र अमिताभ दुबे के विवाह समारोह में आये थे (अमिताभ दुबे, राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन के ट्रस्टी बोर्ड के सदस्य व नेहरु परिवार के खासुलखास श्री सुमन दुबे के सुपुत्र हैं)। अमिताभ दुबे का विवाह अमूल्या गोपीकृष्णन के साथ 15 जनवरी (शनिवार) को हुआ, राहुल गाँधी 14 जनवरी (शुक्रवार) को ही वहाँ पहुँच गये थे।

पाठकों को याद होगा कि किस तरह 26/11 के मुम्बई हमले के ठीक अगले दिन, जबकि मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की माँ की आँखों के आँसू सूखे भी नहीं थे… “राउल विंची”, दिल्ली के बाहरी इलाके में एक फ़ार्म हाउस में अपने दोस्तों के साथ पार्टी मनाने में मशगूल थे… उधर देश के जवान अपनी जान की बाजी लगा रहे थे और सैकड़ों जानें जा चुकी थीं। मुम्बई जाकर अस्पताल में घायलों का हालचाल जानना अथवा महाराष्ट्र की प्रिय कांग्रेस सरकार से जवाब-तलब करने की बजाय उन्होंने दिल्ली में पार्टी मनाना उचित समझा… (यहाँ देखें…)

केरल के कांग्रेसजनों ने राहुल की इस हरकत पर गहरा क्रोध जताया है, स्थानीय कांग्रेसजनों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री अच्युतानन्दन एवं नेता प्रतिपक्ष ओम्मन चाण्डी घटनास्थल पर थे, तो मात्र 70 किमी दूर होकर भी राहुल गाँधी वहाँ क्यों नहीं आये? (परन्तु नेहरु परिवार की गुलामी के संस्कार मन में गहरे पैठे हैं इसलिये कोई भी खुलकर राहुल का विरोध नहीं कर रहा है)।

यदि शनिवार की सुबह राहुल गाँधी उस विवाह समारोह को छोड़कर राहत कार्यों का मुआयना करने चले जाते तो कौन सी आफ़त आ जाती? शादी अटेण्ड करना जरूरी था या दुर्घटना स्थल पर जाना? न सिर्फ़ शनिवार, बल्कि रविवार को भी राहुल बाबा, बोट पर पार्टी मनाते रहे, गज़लें सुनते रहे… उधर बेचारे श्रद्धालु कराह रहे थे, मर रहे थे। यह हैं हमारे भावी प्रधानमंत्री…

अन्ततः शायद खुद ही शर्म आई होगी या किसी सेकुलर कांग्रेसी ने उन्हें सुझाव दिया होगा कि केरल में चुनाव होने वाले हैं इसलिये उन्हें वहाँ जाना चाहिये, तब रविवार शाम को राहुल गाँधी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रमेश चेन्निथला के साथ घटनास्थल के लिये उड़े… लेकिन शायद भगवान अय्यप्पा स्वामी भी, राहुल की “नापाक उपस्थिति” उस जगह नहीं चाहते होंगे इसलिये घने कोहरे की वजह से हेलीकॉप्टर वहाँ उतर न सका, और युवराज बेरंग वापस लौट गये (ये बात और है कि उनके काफ़िले में भारत के करदाताओं की गाढ़ी कमाई की मजबूत गाड़ियाँ व NSG के कमाण्डो की भीड़ थी, वे चाहते तो सड़क मार्ग से भी वहाँ पहुँच सकते थे, लेकिन ऐसा कुछ करने के लिये वैसी “नीयत” भी तो होनी चाहिये…)।

मीडिया के कुछ लोग एवं कांग्रेस के ही कुछ कार्यकर्ता दबी ज़बान में कहते हैं कि रविवार शाम को भी कोहरे, धुंध व बारिश का तो बहाना ही था, असल में राहुल बाबा इसलिये वहाँ नहीं उतरे कि घटनास्थल से लगभग सभी लाशें उठाई जा चुकी थी… ऐसे में राहुल गाँधी वहाँ जाकर क्या करते… न तो मीडिया का फ़ुटेज मिलता और न ही राष्ट्रीय स्तर पर छवि चमकाने का मौका मिलता… इसलिये कोहरे और बारिश का बहाना बनाकर हेलीकॉप्टर वापस ले जाया गया… लेकिन जैसा कि पहले कहा, यदि “नीयत” होती और “दिल से चाहते” तो, सड़क मार्ग से भी जा सकते थे। जब वे नौटंकी करने के लिये किसी दलित की झोंपड़ी में जा सकते हैं, अपना सुरक्षा घेरा तोड़कर उड़ीसा के जंगलों में रहस्यमयी तरीके से गायब हो सकते हैं (यहाँ पढ़ें…), तो क्या शादी-ब्याह-पार्टी में से एक घण्टा घायलों को अस्पताल जाने के लिये नहीं निकाल सकते थे? और कौन सा उन्हें अपने पैरों पर चलकर जाना था, हमारे टैक्स के पैसों पर ही तो मस्ती कर रहे हैं…

कांग्रेस द्वारा “भाड़े पर लिये गये मीडिया” ने तब भी राहुल का गुणगान करना नहीं छोड़ा और इन भाण्डों द्वारा “राहुल की सादगी” के कसीदे काढ़े गये (“सादगी” यानी, उन्होंने इस यात्रा को निजी रखा और केरल की पुलिस को सूचना नहीं दी, न ही हमेशा की तरह “वीआईपी ट्रीटमेंट” लेते हुए रास्ते और ट्रेफ़िक को रोका…। इस सादगी पर बलिहारी जाऊँ…), कुछ “टट्टू” किस्म के अखबारों ने राहुल और प्रियंका द्वारा मार्च 2010 में उनके निजी स्टाफ़ के एक सदस्य के. माधवन की बेटी की शादी में आने को भी “सादगी” मानकर बखान किया… लेकिन किसी भी अखबार या चैनल ने “राउल विंची” द्वारा हिन्दू श्रद्धालुओं के प्रति बरती गई इस क्रूर हरकत को “हाइलाईट” नहीं होने दिया… वरना “ऊपर” से आने वाला पैसा बन्द हो जाता और कई मीडियाकर्मी भूखों मर जाते…। जिन संगठनों को “आतंकवादी” साबित करने के लिये यह गिरा हुआ मीडिया और ये मासूम राहुल बाबा, जी-जान से जुटे हुए हैं, उन्हीं के साथी संगठनों के कार्यकर्ता, रात के अंधेरे में सबरीमाला की पहाड़ियों पर घायलों की मदद कर रहे थे।

जैसी संवेदनहीनता और लापरवाही मुम्बई हमले एवं सबरीमाला दुर्घटना के दौरान “राउल विंची” ने दिखाई है… क्या इसे मात्र उनका “बचपना”(?) या “लापरवाही” कहकर खारिज किया जा सकता है? गलती एक बार हो सकती है, दो-दो बार नहीं। आखिर इसके पीछे कौन सी “मानसिकता” है…
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चलते-चलते : अब कुछ तथ्यों पर नज़र डाल लीजिये…

1) केरल सरकार को प्रतिवर्ष सबरीमाला यात्रा से 3000 करोड़ रुपए की आय होती है।

2) ट्रावणकोर देवस्वम बोर्ड द्वारा राज्य के कुल 1208 मन्दिरों पर साल भर में खर्च किये जाते हैं 80 लाख रुपये। (जी हाँ, एक करोड़ से भी कम)

3) एक माह की सबरीमाला यात्रा के दौरान सिर्फ़ गरीब-मध्यम वर्ग के लोगों द्वारा दिये गये छोटे-छोटे चढ़ावे की दानपेटी रकम ही होती है 131 करोड़…

(लेकिन हिन्दू मन्दिरों के ट्रस्टों और समितियों तथा करोड़ों रुपये पर कब्जा जमाये बैठी “सेकुलर गैंग” सबरीमाला की पहाड़ियों पर श्रद्धालुओं के लिये मूलभूत सुविधाएं – पानी, चिकित्सा, छाँव, पहाड़ियों पर पक्का रास्ता, इत्यादि भी नहीं जुटाती…)

– अरे हाँ… एक बात और, केन्द्रीय सूचना आयुक्त ने RTI के एक जवाब में बताया है कि राहुल गाँधी की सुरक्षा, परिवहन, यात्रा एवं ठहरने-भोजन इत्यादि के खर्च का कोई हिसाब लोकसभा सचिवालय द्वारा नहीं रखा जाता है… इसलिये इस बारे में किसी को नहीं बताया जा सकता…

जय हो… जय हो…

9 Responses to “उधर लाशें उठाई जा रही थीं, इधर “भावी प्रधानमंत्री” पार्टी मना रहे थे… …”

  1. sunil patel

    वाकई बहुत दर्दनाक घटना हुई है.
    * वैसे राहुल जी का का उस जगह से केवेल ७० किलोमीटर दूर होकर नहीं जाना वाकई आश्चर्यजनक है क्योंकि हर कांग्रेसी का सपना राहुल गाँधी को भारत देश का प्रधान मंत्री बनाना ही है.
    * सबरीमाला मेले से ३००० करोड़ आय के वाबजूद १२०८ मन्दिरों पर कुल ८० लाख खर्च – घोर आश्चर्य.

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  2. jeengar durga shankar gahlot

    अभिषेक जी, हमारे विचार पर आपको नाराज होने की कोई जरुरत नहीं है. उस हादसे में हमारे समाज के भी १० युवा दिवंगत हुए हैं. वैसे आपकी जानकारी के लिए हम यह भी बता दें कि – हमारा जीवन-सफ़र किसी की ‘गुलामियत’ में नहीं बना हुआ है. कृपया,शब्दों में शालीनता बनाये रखें, स्वाथ्य के लिए ठीक रहता है. फिर आप तो ‘ पुरोहित – वंश ‘ से हो, उच्च शिक्षित भी होंगे ही, ‘आरएसएस’ को समर्पित है ही जहाँ बोद्धिक भी सिखाया जाता है और संस्कार भी सिखाये जाते होंगे. फिर जो मर्जी आपकी. हमें तो आपका हर शब्द स्वीकार है, आखिर ‘पुरोहित’ जो हैं आप. धन्यवाद.
    – जीनगर दुर्गा शंकर गहलोत, मकबरा बाज़ार, कोटा – ३२४ ००६ (राज.) ; मो. ९८८७२-३२७८६

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  3. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    aaj kal log bina koyi tathy jane falatu ki bate karate rahate hai ………………..प्रत्य्ग्दार्शियो ki bat agar mai बताऊंगा ki koun जिम्मेदार the is घटना ke to यहाँ बहुत logo को bura लगेगा………..सार्वजनिक sthano पर ki jane वाली अनुशासन हीनता hi बहुत jyda matra me दोषी hoti hai esi घटनाओ ki………..वरना har sal itani ही भीड़ jutati है………….

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  4. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

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    सुरेशजी, भावनात्मक आलेख के लिए धन्यवाद. राजस्थान में भी गत भाजपा शासन में जोधपुर में दशहरा समय के नवरात्रा के पहले दिन ही मेहरानगढ़ हादसा हो गया था जिसमे अनेको युवा मर गए थे, कितने ही परिवारों के चिराग इस हादसे में बुझ गए थे. लेकिन उस हादसे पर जिस तरह की राजनीति हुई और प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जिस तरह का राजनीति खेल खेला – वह इन्ही राजनेताओं की बेशर्मी और अमानवीयता का ही परिचायक रहा है, जिसके दोषियों पर अभी तक भी कानून का हाथ नहीं पहुच पा रहा है.लेकिन, तब उस घटना पर और नेताओं पर किसी ने भी इतनी तीखी टिपणी नहीं की थी, जितनी इस आलेख में राष्ट्रवादी लेखक सुरेश जी ने की है और जिस पर अभिषेक पुरोहित और हर्ष वर्धन के खुबसूरत विचार भी आये. इन सबको धन्यवाद.

    – जीनगर दुर्गा शंकर गहलोत, मकबरा बाज़ार, कोटा – ३२४ ००६ (राज.) ; मो. ०९८८७२-३२७८६
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    मेरे ghar से adhe किलोमीटर dur की ghatana hai is लिए mujhe बहुत jyda पता hai ,तो suniye साहब कभी us समय के koyi sthaniy akhbar ya 24 new channel jaie koyi sthaniy चैनल से जानकारी इक्कात्ति kar लीजियेगा की naikar पहने कौन लोग लाशो को अस्पताल me pahucha रहे the ,ये अलग bat है की koyi nahi बचा क्योकि बहुत पहले hi unaki deadh ho चुकी थी ,आपके चहेते kongres ne raj parivar को बचाया our unake ही parivar की बेटी को tikat diya jo अभी जोधपुर की एम् pi है ,जब tathy malum न ho न फालतू के bak बक kara कोंग्रेस से apni निष्ट जताने की जरुरत नहीं है ,जोधपुर की घटना का जिक्र कर बहुत भद्दा majak किया है jo मुझे बिलकुल pasand नहीं आया है मेरे दोस्त v ek padosi की देअथ usame हुयी थी

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  5. jeengar durga shankar gahlot

    सुरेशजी, भावनात्मक आलेख के लिए धन्यवाद. राजस्थान में भी गत भाजपा शासन में जोधपुर में दशहरा समय के नवरात्रा के पहले दिन ही मेहरानगढ़ हादसा हो गया था जिसमे अनेको युवा मर गए थे, कितने ही परिवारों के चिराग इस हादसे में बुझ गए थे. लेकिन उस हादसे पर जिस तरह की राजनीति हुई और प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जिस तरह का राजनीति खेल खेला – वह इन्ही राजनेताओं की बेशर्मी और अमानवीयता का ही परिचायक रहा है, जिसके दोषियों पर अभी तक भी कानून का हाथ नहीं पहुच पा रहा है.लेकिन, तब उस घटना पर और नेताओं पर किसी ने भी इतनी तीखी टिपणी नहीं की थी, जितनी इस आलेख में राष्ट्रवादी लेखक सुरेश जी ने की है और जिस पर अभिषेक पुरोहित और हर्ष वर्धन के खुबसूरत विचार भी आये. इन सबको धन्यवाद.

    – जीनगर दुर्गा शंकर गहलोत, मकबरा बाज़ार, कोटा – ३२४ ००६ (राज.) ; मो. ०९८८७२-३२७८६

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  6. Harsh Vardhan

    भाई हिन्दू मरे ना तो कोई नहीं रोता अगर बतला हाउस में आतंक वादी मुस्लमान मारा जाये तो राजनीती के ये भडुए आजमगढ़ तक जाके माथा टेकते हैं इन के लिए इंस्पेक्टर मोहन चन्द्र शर्मा जैसों की शहादत भी केवल बकरीद के बकरे से भी गयी बीती है, भगवन के यहाँ जवाव देने में इनको सोचना पड़ेगा- जय श्री राम

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  7. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    वैसे chipalunkar ji “raul vinchi” ko jane dijiye…………….apana बाबा है ………….mouj masti करने keral गया tha ……………….अत दारू का khumar उतरा nahi होगा……………..अब सुरूर me 1 मरे ya 100 बाबा ko kya frk padata है वैसे bhi hinduo ki jan ki koyi kimat thodi है ……………..

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  8. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    aap to madad karane nahi gaye na janab ,तो apana muskurata muh band hi रखिये……………..vaise हमने तो कभी suna nahi एसा होते ……………….फिर “काफ़िर” hinduo ke लिए तो कभी नहीं …………..लेकिन abhi हल ki badh me apako nekar वाले दाड़ी वालो की लाशे uthate dikh जायेंगे ………………जिनको मारने ka इल्जाम आपके aka कोंगेर्स वाले un पर laga रहे hai…………………ओर्र ha vo भी andra me ही………

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  9. इफ्तेख़ार अहमद

    iftekhar.ahmed.no1

    जमातुद्दावा(Lashkar) के लोग भी किसी दुर्घटना और आपदा के बाद लोगो की मादा करते है तो किया????????????????????????????????

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