धर्म के नाम पर नफरत का कारोबार

-आर.ल.फ्रांसिस

इस्लाम को मानवता विरोधी बताते हुए अमेरिकी चर्च के एक हिस्से ने 9/11 को अमेरिका पर हुए अलकायदा के हमले की वर्षगांठ पर पवित्र कुरान को जलाने की घोषणा करके दुनिया भर के मुस्लिम समाज में बैचानी पैदा कर दी है। फलोरिडा के डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर के पास्टर टेरी जॉस अपनी निंदा की परवाह न करते हुए पवित्र कुरान को जलाने पर अड़े हुए है। अपने अड़यल रवैये के कारण डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर को दुनिया भर में ईसाइयत के नाम पर नफरत का कारोबार चलाने में मदद मिल रही है। उक्त सेंटर इस्लाम विरोधी नारे लिखी टीशर्ट और इस्लाम विरोधी सहित्य को बड़े पैमाने पर दुनिया भर में बेच रहा है।

डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर के इस फैसले से अमेरिकी सरकार डरी हुई नजर आ रही है पिछले दिनों अमेरिकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने चर्च कोकुरान जलाओं कार्यक्रम वापिस लेने की मांग की है। इसके पूर्व अफगानिस्तान में अमेरिकी शीर्ष कमांडर डेविड पेट्रायस ने वाहट हाउस से कहा है कि कुरान जलाने से विदेशों में खासकर युद्वग्रस्त देश में अमेरिकी बलों को खतरा हो सकता है। काबुल से एक बयान में डेविड पेट्रायस ने कहा कि वह कुरान जलाने के प्रस्ताव से क्षुब्ध है और इससे समूचे प्रयासों को झटका लग सकता है। हालांकि वेटिकन ने समूहिक रुप से कुरान की प्रतियां जलाने की योजना को घोर निंदनीय एवं शर्मनाक करार देते हुए इसकी भर्त्सना की है।

11 सितंबर को पवित्र कुरान जलाये जाने की योजना के कारण मुस्लिम समाज में बैचानी लगातार बड़ रही है। 4 अगस्त को मुस्लिम स्टूडेंट ऑफ इंडिया के सैकड़ों कार्यकर्ता दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन भी कर चुके है। मुस्लिम समाज के नेताओं ने सरकार से मांग की है कि वह फलोरिडा चर्च के फैसले के विरुद्व अमेरिकी राष्ट्रपति से बात करे। विश्व भर में फैले मुस्लिम समाज का एक बड़ा हिस्सा भारत में है और इस्लाम के प्रति होने वाले किसी भी घटनाक्रम से यह वर्ग अपने को अलग नही रख सकता। भारत में 20 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। अगर अमेरिकी प्रशासन ईसाइयत के नाम पर नफरत का कारोबार चलाने वालो पर नकेल नही कसता तो उसका असर भारत में भी दिखाई देगा। अपने देश में अमन-शांति कायम रहे इसके लिए सरकार को प्रयास करने होगे।

कुछ समय पहले केरल में कुछ इस्लामी जेहादियों ने एक कैथोलिक प्रोफेसर का दिनदहाड़े हाथ काट दिया था क्योंकि उसने कालेज के प्रश्नपत्र में पैगंबर के बारे में कोई अपतिजनक स्वाल लिख दिया था। पॉपुलर फ्रंट से जुड़े लोगो ने अपना विरोध जताने के लिए उनका हाथ उनके शरीर से अलग कर दिया था। हालांकि यह मामला दोनो समुदाओं की समझदारी से सप्रदायिक रंग नही ले पाया और केरल की वाम मोर्चा सरकार ने दोषियों को पकड़कर कानून के हवाले कर दिया।लेकिन चर्च नेतृत्व यह जानता है कि अगर अमेरिका में कुरान को जलाया जाता है तो उसकी ऑंच उस तक भी पहुचेंगी। इसलिए दोनो वर्गो के बीच समझदारी एवं आपसी सौहार्द बनाये रखने के प्रयास शुरु हो गए है लेकिन जिस तरीके से दोनों वर्गो (मुस्लिम/ ईसाइयों) के बीच समझदारी एवं आपसी सौहार्द बनाने की बात हो रही है वह बेहद चौंकानेवाली एवं आने वाले समय में घातक साबित होने वाली है।

चर्च संगठन पिछले कई वर्षो से धर्मातंरण और अपने काम करने के तरीकों के कारण हिन्दू संगठनों के निशाने पर है। पिछले कुछ वर्षो में उड़ीसा, कर्नाटका, आघ्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, झाारखंड, छतीसगड़ जैसे राज्यों में तनाव बढ़ा है। चर्च को अपना कामकाज समान्य तरीके से चलाये रखने के लिए एक मजबूत सहयोगी की जरुरत थी जो उसे मुस्लिम समाज के रुप में मिला है। हालांकि धर्मांतरण को लेकर मुस्लिम समाज पूरी तरह सचेत है और वह अपने क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों की घुसपैठ को बर्दाशत नही करता। पिछले दिनों कमशीर से कुछ मुस्लिमों के धर्मपरिर्वतन की खबरे आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने विदेशी ईसाई मिशनरियों को घाटी से बाहर कर दिया।

कैथोलिक क्रिश्चियन सेक्यूलर फोरम ने पिछले दिनों भोपाल कैथोलिक आर्चडायसिस के बिशप माननीय लियो कार्नलियों की तरफ से एक अपील जारी की। अपील में फलोरिडा के डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर द्वारा कुरान जलाये जाने की योजना का विरोध करते हुए इस्लाम को मानवतावादी बताया गया। इसमें यह भी कहा गया कि वेटिकन समेत अधिक्तर ईसाई सगठनों ने इस योजना का विरोध किया है।इसलिए मुस्लिम समाज को विदेशों में घटने वाली घटना को यहा तूल नही देना चाहिए। इसमें मुस्लिम समाज को समझाने वाले तरीके से बताया गया है कि भारत में ईसाई और मुस्लिम दोनों अल्पसंख्यक है और यहां वह विभिन्न प्रकार की समास्ओं का सामना कर रहे है। और यहा उनका साझा दुशमन कट्टरपंथी हिन्दु संगठन है। इस कारण उन्हें यहां अपनी एकता हर हलात में बनाये रखनी चाहिए ताकि उनके दुशमन उनकी फूट का लाभ न उठा पाये।यानी शांति के नाम पर भी नफरत का कारोबार जारी है। चर्च की यह सोच भविष्य के भारत और उसकी योजना की एक झांकी प्रस्तुत करती है।

3 thoughts on “धर्म के नाम पर नफरत का कारोबार

  1. अस्सी के दशक में शीतयुद्ध के अवसान की बेला में सोवियत संघ की अफगानिस्तान में सार्थक उपस्थिति को लेकर अमरीका और नाटो देशों ने सी आई ऐ तथा पेंटागन की मदद से पाकिस्तान ,अफगानिस्तान में कट्टरपंथी तत्वों को न केवल सोवियत संघ अपितु दक्षिण एशिया {खास तौर से भारत }को साम्प्रदायिक उन्माद की ओर धकेल दिया ,जब सोवियत सेनाएं वापिस गईं तो वहां की सत्ता पर अमरीका ने ही तालीवान को बिठाया था ताकि विश्व के सबसे अहम सामरिक केंद्र को शक्तिहीन किया जा सके ओर पश्चिम एसिया के पेट्रोलियम भंडार पर अमरीका काबिज रह सके .लेकिन जब सद्दाम या ईरान ने उसका विरोध किया तो उन्हें ही आपस में लडवा दिया .जब इतने पर भी ईराक ने हार नहं मानी तो रासायनिक हथियार बनाने के झूंठे आरोप लगाकर उसे बर्वाद कर दिया .जब किसी कौम को इतना सतोगे तो ९/११ की दुखद ह्गात्नाएं न हों यह कैसे सम्भव हैं .अब चर्च से जुड़े लोग कर तो कुछ नहीं प् रहे लेकिन वयं वीरता दिखा रहे हैं ऐसे ही वयां वीर भारत के चप्पे -चप्पे में हैं इस प्रवक्ता .com par apni adhahpatan maansikta prdarshit karte rhte hai .

  2. बड़ी रोचक स्थिती है. इस्लाम और ईसायत दोनों का असहिष्णु चेहरा सामने आ रहा है. इसे ध्यान से देखें और समझें. तब हिदू धर्म व राष्ट्र की दिन-रात आलोचना करने वाले इन दोनों सम्प्रदायों की असलियत से अपने सर्वश्रेष्ठ धर्म की तुलना करें. जिससे हिन्दू विरोधी झूठे प्रचार से पैदा हीनता की मैल हमारे मानों से कुछ तो निकल जाये.

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