बेईमानी का फल‌

ratमिली नौकरी चूहेजी को,

बस के कंडेक्टर की|

लगे समझने बस को जैसे,

खेती हो वह घर की|

 

बस में बैठे सभी मुसाफिर,

उनसे टिकिट मंगाते|

पैसे तो वे सबसे लेते,

पर ना टिकिट बनाते|

 

पूछा लोगों ने चूहेजी,

यह कैसी बेईमानी|

सरकारी पैसे से क्यों ,

करते हो छेड़ाखानी|

 

बोला..टिकिट बनाता तो हूं,

तुम तक पहुंच न पाते|

कागज़ खाने की आदत से,

टिकिट हमीं खा जाते|

 

उत्तर सुन ,लोगों ने पूछा,

नोट क्यों नहीं खाये|

लिये टिकिट के रुपये हैं तो,

उनको कहां छुपाये|

 

बगलें लगा झांकने चूहा,

छोड़ छाड़ बस भागा|

बिल्ली पीछे दौड़ पड़ी,

तो मारा गया अभागा|

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प्रभुदयाल श्रीवास्तव
लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

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