दुर्गेश्वर राय
वैश्विक सैन्य पटल पर जब स्वतंत्र राष्ट्रीय वायुसेनाओं की तुलना की जाती है तो भारतीय वायुसेना अमेरिका और रूस के ठीक पीछे दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली वायु शक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी है। वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ़ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट (डब्ल्यू.डी.एम.एम.ए.) की इस रिपोर्ट में भारत ने अपने चीन को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया है। 3,733 से अधिक सैन्य विमानों वाले चीन के विशाल बेड़े के मुकाबले भारत ने अपने 1,716 विमानों के साथ उच्च रेटिंग हासिल की है। यह वैश्विक मुकाम भारतीय वायुसेना के संतुलित बेड़े, लड़ाकू पायलटों के गहन प्रशिक्षण, और हालिया वर्षों में चलाए गए जटिल सामरिक अभियानों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
इस व्यापक मूल्यांकन को जारी करने वाली संस्था डब्ल्यू.डी.एम.एम.ए. एक स्वतंत्र और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय निकाय है, जो दुनिया के 103 देशों की 129 सैन्य हवाई सेवाओं और लगभग 48,000 विमानों के परिचालन डेटा की लगातार समीक्षा करती है। यह संस्था केवल किसी देश की वायुसेना की मुख्य शाखा का ही नहीं, बल्कि उसकी थल सेना, नौसेना और मरीन कोर के हवाई बेड़ों का भी अलग-अलग अध्ययन करती है। डब्ल्यू.डी.एम.एम.ए. का उद्देश्य केवल पारंपरिक हथियारों की गिनती से आगे बढ़कर आधुनिक युद्ध पद्धतियों के अनुरूप किसी देश की वास्तविक हवाई क्षमता को उजागर करना है।
वायु शक्ति के मापन के लिए यह संस्था अपनी विशेष ट्रू वैल्यू रेटिंग (टी.वी.आर.) प्रणाली का उपयोग करती है। पारंपरिक धारणाओं से अलग, टी.वी.आर. फाइटर जेट्स की संख्या पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय सैन्य बेड़े के समग्र संतुलन को मापती है। इसमें विमानों की तकनीकी स्थिति, आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताएं, लॉजिस्टिक्स समर्थन, प्रशिक्षण विमानों की उपलब्धता, रिफ्यूलिंग टैंकर्स, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणालियों और स्थानीय एयरोस्पेस निर्माण क्षमता का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है। रक्षा आधुनिकीकरण की गति और भविष्य के नए ऑर्डर भी इस रेटिंग को प्रभावित करते हैं।
इस रेटिंग के मायने अंतरराष्ट्रीय रणनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। टी.वी.आर. का यह गणित साफ करता है कि युद्ध के मैदान में निष्क्रिय पड़े विमानों की भीड़ से ज्यादा महत्वपूर्ण एक मुस्तैद, आधुनिक और बहुउद्देशीय बेड़ा होता है। यह रेटिंग दर्शाती है कि कोई देश किसी आपात स्थिति में अपनी सीमा से दूर कितनी तेज़ी से पहुँच सकता है और कितने लंबे समय तक हवा में अपना नियंत्रण कायम रख सकता है।
समग्र सैन्य हवाई शाखाओं की सूची में भारत 69.4 टी.वी.आर. अंक के साथ छठवें स्थान पर है, जहाँ शीर्ष पाँच में अमेरिका के चार अलग-अलग सैन्य अंग और रूसी वायुसेना शामिल हैं। परंतु केवल स्वतंत्र वायुसेनाओं की श्रेणी में आते ही भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर आ जाता है। भारत के 1,716 विमानों के बेड़े में 542 फाइटर जेट्स, 498 हेलीकॉप्टर, 282 रणनीतिक परिवहन विमान और 374 प्रशिक्षण विमान शामिल हैं। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000 और स्वदेशी तेजस जैसे उन्नत जेट्स भारत की हवाई सीमा की रक्षा करते हैं।
भारतीय वायुसेना की इस उच्च रेटिंग का बड़ा आधार उसके द्वारा चलाए गए बड़े और नवीन अभियान रहे हैं। बालाकोट एयरस्ट्राइक ने दुनिया को भारत की सटीक आक्रामक क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का परिचय दिया था। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ हुए तनाव के दौरान भारतीय वायुसेना ने जिस गति से अत्यधिक ऊंचाई वाले अग्रिम इलाकों में सुखोई-30, राफेल और थल सेना के भारी हथियारों की तैनाती की, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सामरिक मुस्तैदी को साबित किया।
युद्धक अभियानों के अलावा, भारतीय वायुसेना ने संकटग्रस्त क्षेत्रों से मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है। ऑपरेशन देवी शक्ति के तहत तालिबान के कब्जे के बाद काबुल से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि यूक्रेन संकट के दौरान ऑपरेशन गंगा के तहत सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों ने युद्धग्रस्त सीमावर्ती देशों से हजारों भारतीय छात्रों को सुरक्षित स्वदेश पहुँचाया। इसी तरह सूडान से ऑपरेशन कावेरी और तुर्की-सीरिया में आए भीषण भूकंप के बाद ऑपरेशन दोस्त के माध्यम से राहत सामग्री और रेस्क्यू टीमों की त्वरित तैनाती ने भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की परिवहन क्षमता और मानवीय दृष्टिकोण को वैश्विक पटल पर रेखांकित किया है।
उभरती हुई भारतीय वायुसेना अब पूर्ण आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को दिए गए तेजस मार्क-1ए के बड़े ऑर्डर, नए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की अधिग्रहण प्रक्रिया और पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट का स्वदेशी विकास भारत के भावी स्वरूप को गढ़ रहा है। डब्ल्यू.डी.एम.एम.ए. का यह आकलन साबित करता है कि भारत न केवल अपनी सीमाओं का सजग प्रहरी है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने वाला एक सामर्थ्यवान वैश्विक सैन्य स्तंभ बन चुका है।