अमेरिका से मोदी लाएंगे खुशियों की सौगात

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modi in america
शैलेंद्र जोशी
पूर्व की तरफ देखो और पश्चिम से नाता जोड़ो के संदेश के साथ मेक इन इंडिया अभियान का आगाज करते हुए प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि के प्रथम दिन गुरुवार को मंगल मंतव्य लेकर अमेरिका रवाना हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा पर पूरी दुनिया की आंखें टिकी हुई हैं और उम्मीद की जा रही है कि अमेरिका के साथ न केवल प्रगाढ़ता बढ़ेगी बल्कि पिछले कुछ सालों से रिश्तों का आया रुखापन दूर होकर संबंधों में स्निघता आएगी। साथ ही मोदी को अमेरिका को इस बात का एक करारा रणनीतिक जवाब भी होगा कि जिस अमेरिका ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया था, वही अमेरिका आज मोदी के स्वागत में पलक-पावड़े बिछाए हुए है।
प्रधानमंत्री मोदी पश्चिमी देशों के साथ सपंर्क बढ़ाने, संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा लेने और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मिलकर द्विपक्षीय सबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए पांच दिवसीय सरकारी यात्रा पर एयर इंडिया के विशेष विमान से अमेरिका रवाना हो गए। वे 30 सितंबर तक अमेरिका के दौरे पर होंगे। इस दौरान करीब 100 घंटे के प्रवास में वे करीब 35 कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। इसके पहले कहा जा रहा था कि वे 50 कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, लेकिन यह व्यवहारिक तौर पर संभव नहीं हो रहा था। इसलिए कार्यक्रमों में संख्या में कुछ कटौती की गई। कार्यक्रम के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा के बीच 29 और 30 सितंबर को दो बार मुलाकात होगी। दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की इस मुलाकात पर जाहिर है सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
करीब चार महीने पहले भाजपा को एकतरफा विजय दिलाकर सत्ता पर काबिज होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की सबसे बड़ी और सबसे अहम यात्रा है। बतौर प्रधानमंत्री अपनी पहली अमेरिका यात्रा के दौरान मोदी का कार्यक्रम काफी व्यस्त है। अमेरिका पहुंचने के बाद सबसे पहले न्यूयॉर्क में शहर के मेयर पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे। 27 सितंबर की सुबह मोदी 9/11 हमले की जगह पर बने स्मारक पर जाएंगे। इसी दिन मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। मोदी 28 को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर में 20 हजार से ज्यादा इंडियन-अमेरिकन लोगों की सभा को संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति बराक ओबामा से दो बार मुलाकात होगी। पहली मुलाकात 29 सितंबर को वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस में निजी डिनर पर होगी। इसके अगले दिन दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय चर्चा होगी। अपनी यात्रा के दौरान मोदी पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और हिलेरी क्लिंटन से भी मिलेंगे। मोदी तीन राज्यों के गवर्नरों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा 29 सितंबर को ब्रेकफास्ट मीटिंग के दौरान मोदी गूगल, पेप्सिको जैसी नामी कंपनियों के करीब एक दर्जन सीईओ से भी बात करेंगे।
मोदी वाशिंगटन में लिंकन और मार्टिन लूथर किंग के स्मारक पर भी जाएंगे। वे खासतौर पर महात्मा गांधी प्रतिमा पर भी श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। संभवत: यह  पहली बार होगा, जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री अमेरिकी यात्रा के दौरान इतने सारे सरकारी और निजी कार्यक्रमों में शिरकत करेगा।
सबसे ज्यादा जिज्ञासा राष्ट्रपति बराक ओबामा और मोदी के मुलाकात की है। हालांकि द्विपक्षीय समझौतों पर दस्तखत का दिन 30 सितंबर होगा, जब उप राष्ट्रपति जो बिडेन और विदेश मंत्री जॉन कैरी नरेंद्र मोदी के सम्मान में लंच देंगे।
गौरतलब है कि मोदी की जापान यात्रा और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान भी उनकी कूटनीतिक सोच और पहल को महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में भारत-अमेरिकी संबंधों में हाल में आए ठहराव और रुखेपन के मद्देनजर इस यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है। भारत अमेरिका के लिए सबसे बड़ा बाजार है। इसके मद्देनजर एक ओर जहां अमेरिका, भारत के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा, वहीं सामरिक के साथ-साथ व्यापारिक क्षेत्र में भी सहयोग को गति देना चाहेगा। बेशक मोदी द्वारा चुनाव प्रचार और उसके बाद भी दिखाए गए त्वरित और सर्वांगीण विकास के सपने को साकार करने के लिए भारत को भी भारी निवेश की जरूरत है। भारत के प्रति अमेरिका के रुख में आए बदलाव को विश्व स्तर पर भी सकारात्मक संकेत ही माना जा रहा है, ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि मोदी अमेरिका से भी एक समझौतों और सहायता का खुशनुमा गुलदस्ता लेकर लौटेंगे।


1 COMMENT

  1. लाएंगे, क्या क्या लाएंगे? ज्यादा उम्मीदे न बांधे तो अच्छा है, कई बार उम्मीदों के फल बहुत भरी होते हैं, अमेरिका अभी खुद फंसा पड़ा है, वैसे भी भी अमेरिका जितनी आसानी से अपनी जेब पाकिस्तान के लिए मार व गाली खा कर भी ढीली करता है,भारत के प्रति उसका भाव नहीं दिखाता तो बहुत कुछ है पर हमें लॉलीपॉप दे कर टाल देता है , यह भारत अमेरिका के संबंधों का इतिहास बताता है, शेष तो वक्त ही बताएगा , कि प्रवासी भारतीयों की लॉबी कितना वहां के प्रशासन को प्रभावित कर पाती है

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