लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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  1. चोर की चोरी, चोरी की कार,
    कैसा लगा अनुप्रास अलंकार?
    होंडा सिटी में धन था अपार,
    सामने से आगई वैगनार।
    लूट के धन सब हुए फरार,
    कुछ दूर जाकर छोड़ी कार।…
    दिल्ली पोलिस बड़ी बेकार,
    शिंदे से जाकर करो तकरार।
    सट्टे का धन है या कालाबज़ार,
    कहां से आया धन का अंबार?
    संसद मे जाओ करो अब शोर,
    जाओ करवाओ उन्हें गिरफ्तार।
    पकड़ो जिसने करे पाप घोर,
    लूटा है जिसने न देखे वो भोर।

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