दौरे-उल्फत की हर बात याद है मुझे

दौरे-उल्फत की हर बात याद है मुझे

तुझसे हुई वह मुलाकात याद है मुझे।

बरसते पानी में हुस्न का धुल जाना

दहकी हुई वह बरसात याद है मुझे।

तेरा संवरना उसपे ढलका आंचल

संवरी बिखरी सी हयात याद है मुझे।

सर्द कमरे में गर्म साँसों की महक

हसीं लम्हों की सौगात याद है मुझे।

दिल में उतरके रहने की तेरी वो ज़िद

ह्या में डूबी रेशमी रात याद है मुझे।

तेरी आँखों की मुस्कराती तहरीर

दिल लुभाती हर बात याद है मुझे।

पत्थर पत्थर है कहाँ पिघलता है

मोम नर्म दिल है तब ही जलता है।

बादल के पास अपना कुछ भी नहीं

समंदर का गम लेकर बरसता है।

जरा सी बात पर खफ़ा जो होता है

हर बात पर वही तो बिगड़ता है।

पुरानी यादों से आग निकलती है

दरिया आग का बहता लगता है।

जितने दिन भी जी लेता है आदमी

कर्ज़ साँसों का ही अदा करता है।

गुबार जो इक्कठा होता है दिल में

ग़ज़ल बनकर लब से निकलता है।

1 thought on “दौरे-उल्फत की हर बात याद है मुझे

  1. प्रवक्ता.कॉम की झलकी देखी है | अच्छी लगी | फिर कभी फुर्सत से आऊँगा |
    – शून्य आकांक्षी

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