टीआरपी के रेस में संस्कृति का मज़ाक मत बनाइए

अनुश्री मुखर्जी

मुझे इस विवाद में नहीं पड़ना कि रियलिटी शोज ने 1990 के दशक में भारत में जब दस्तक दी थी, तब किसकी सरकार थी और उस वक्त ये क्यों नहीं देखा गया कि भारत में रिएलिटी शोज का जो खांका तैयार हो रहा है वो सारे फॉर्मेट विदेशों की कॉपी हैं और सच में अगर ऐसा हुआ तो आने वाला आधुनिक समाज किस कदर प्रभावित होगा। मैं उसके बाद के भी सरकारों द्वारा इसे बढ़ावा दिए जाने पर सवाल उठाना समय की बर्बादी ही कहूंगी। वो इसलिए क्योंकि आज विदेशों के पैटर्न पर आधारित ये रिएलिटी शोज भारत में पूरी तरह से पांव पसार चुके हैं, सो अगर हम इन्हें जानें, समझें और इससे प्रभावित हो रही संस्कृति को बचाने के लिए समाधान की तरफ जाएं तो ज्यादा बेहतर होगा। ये बातें आज इसलिए उठाना तर्कसंगत है, क्योंकि हाल में चर्चित शो बिग बॉस-10 में जो घिनौनापन लगातार प्रस्तुत हुआ है, वह हमारे देश की सभ्यता के खिलाफ है।

मेरा सवाल है कि अगर ऐसे टीवी चैनल्स को भी लगता है कि ये चीजें गलत हैं तथा हमारी संस्कृति के खिलाफ है तो आप दिखाते क्यों हो ? और उससे भी पहले कि ऐसे किरदार को ढूंढ़ते क्यों हो ? मुझे पता है कि इनके पास जवाब भी होगा कि हर सीजन के रिएलिटी शो से पहले हम ऑडिशन कर चयन करते हैं और मनोरंजन के लिए रिएलिटी देश के सामने प्रस्तुत करते हैं। लेकिन फिर मेरा इनसे सवाल होगा कि आप अपने रिएलिटी शो को हिट बनाने के लिए एक ऐसे कैरेक्टर को ही बहूरूपिया बनाकर क्यों ला रहे हैं जो देश में सारे संतों की छवि को शर्मसार कर रहा हो ? आपको ताज्जुब होगा कि मौजूदा बिग बॉस में जिस लाल-वस्त्र-धारी को ‘स्वामी’ और फिर ‘ओम’ और फिर अंत में ‘जी’, यानि ‘स्वामी ओम जी’ नाम देकर (सनातन धर्म में ‘स्वामी’ बेहद आदर्शवादी सम्मानसूचक शब्द है और ‘ओम’ ईश्वरसूचक) लाया गया और उसका एक कैरेक्टर तैयार किया गया, उसका नाम वास्तव में विनोदानंद झा है। अपने बयान और हरकतों से सुर्खियों में रहनेवाले विनोदानंद झा ने दिल्ली में 2014 चुनाव भी लड़ा था। बाबा का लबादा ओढ़ने के बाद इन्होंने इलेक्शन कमीशन को दिए गए अपने हलफनामे में भी अपना नाम सदाचारी बाबा लिख दिया था। इससे पहले यह जेल भी जा चुका है। उस पर साइकिल चुराने से लेकर महिलाओं के साथ अश्लीलता के साथ कई दूसरे आपराधिक मामले जैसे चोरी, आर्म्स एक्ट, पोटा, झूठे मुकदमे दर्ज कराने का धंधा, मसाज पार्लर की आड़ में ब्लैकमेलिंग और जमीन कब्जा करने का आरोप है, जिनकी जांच चल रही है। ऐसे करीब आधा दर्जन से ज्यादा मुकदमे विनोदानंद झा पर दिल्ली के अलग-अलग थानों में दर्ज हो चुके हैं. सबसे ताज्जुब की बात यह कि इसमें से चोरी का मामला विनोदानंद झा पर उनके सगे भाई प्रमोद कुमार ने ही दर्ज करवा रखा है। विनोदानंद झा के बारे में इन तथ्यों को बताने का मतलब ये प्रकाश में लाना है कि अगर ये बातें सार्वजनिक थीं तो चैनल ने उन्हें फिर शोज में लिया ही क्यों ? क्यों उनके नाम को बदलकर और बाबा के रूप में उन्हें प्रस्तुत किया ? अगर ऐसे कृत्य चैनल द्वारा किए गए हैं तो क्या इसके पीछे मान लिया जाए कि ये विदेशी पैटर्न पर आधारित शोज के निर्माता ऐसे ही कैरेक्टर्स को ढूंढ़ते हैं जिससे इनका शो हिट हो जाए (भले ही देश की संस्कृति कुछ भी हो), या ये मान लिया जाए कि इन विदेशी शोज के माध्यम से जान-बूझकर हमारे सनातन धर्म को बदनाम करने की अब गहरी साजिश हो रही है।

रियलिटी शोज यानि वैसे प्रोग्राम्स जो स्क्रिप्टेड नहीं होते। यह कहा जाता है कि रियलिटी शो में स्क्रीप्ट को तरजीह नहीं दी जाती और आम लोगों के जरिए सच को पेश करने का दावा भी किया जाता है। लेकिन टीआरपी बढ़ाने के लिए रियलिटी शोज को स्क्रीप्टिंग के जरिए सनसनीखेज बनाने के आरोप भी हमेशा से लगते रहे हैं। देखा जाए तो रिएलिटी शोज में सारी चीजें स्क्रिप्टेड होती हैं। किसी जूते पॉलिश या किसी अन्य मेहनतकश के बेटे को ऐसे पेश करवाया जाता है, रोते हुए उसे कैमरे में कैद किया जाता है, जैसे वह पेशा कितना हीन हो। लेकिन काम तो काम है, कुछ छोटा-बड़ा नहीं होता, लेकिन उन्हें ऐसे प्रस्तुत किया जाता है जैसे उनका पेशा कितना निर्घिन्न हो। इससे देश में ऐसे करोड़ों कामगारों व बच्चों में भी तो हीनता की भावना आती है।

देश में चर्चित अधिकांश शो विदेशों की कॉपी हैं। उन शोज पर नज़र डालिए। इंडियन आइडलः सिंगिंग की दुनिया का सबसे पॉपुलर शो ‘इंडियन आइडल’ भी अमरीकन शो ‘अमरीकन आइडल’ की तर्ज पर बना है। सो यू थिंक यू कैन डांसः डांस शो ‘सो यू…’ अमरीकन डांस शो का इंडियन’ वर्जन है। कॉमेडी नाइट्स विद् कपिलः ‘कॉमेडी…’ काफी पॉपुलर रहा है। यह ब्रिटिश शो ‘द कुमार एट नंबर 42 कॉमेडियन’ से लिया गया है। बिग बॉसः ‘बिग बॉस’ इंग्लिश शो ‘बिग ब्रदर’ की कॉपी है। ‘बिग ब्रदर’ सबसे पहले नीदरलैंड में लॉन्च हुआ था। इंडियाज गॉट टैलेंटः ‘अमरीका गॉट टैलेंट’ की तर्ज पर इंडिया में ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ शुरू हुआ। शो का कॉन्सेप्ट ‘ब्रिटिश गॉट टैलेंट’ से लिया गया है। कौन बनेगा करोड़पतिः ब्रिटिश शो ‘हू वॉन्ट्स टु बी अ मिलेनियर’ के हिन्दी रूपांतरण ‘कौन बनेगा करोड़पति’ को जब इंडिया में शुरू किया गया तो इसे यहां काफी फेम मिली। सच का सामनाः सच बोलने की हिम्मत सभी में नहीं होती है। ऐेसे में लोगों से सच कहलवाने और इसके बदले उन्हें कैश प्राइज देने वाले शो ‘मोमेंट ऑफ ट्रूथ’ को ऑडियंस ने काफी पसंद किया था। इस कैनेडियन शो की तर्ज पर इंडिया में भी ‘सच का सामना’ टाइटल से शुरू किया गया। इसे राजीव खंडेलवाल ने होस्ट किया था। हालांकि इस शो की टीआरपी यहां इतनी नहीं रही थी। खतरों के खिलाड़ीः फिल्मों और टीवी शोज में एक्टर्स के स्टंट सीन ऑडियंस को लुभाते हैं, लेकिन लेकिन इसके पीछे कई तरह की टेक्निक्स और स्टंटमैन होते हैं। एेसे में अमरीका में ‘फीयर फैक्टर’ टाइटल से रियलिटी शो शुरू हुआ, जिसमें सेलेब्स को रीयल में स्टंट्स करवाए गए। इस शो को हिन्दी में भी लाया गया, जिसे ‘खतरों के खिलाड़ी’ टाइटल दिया गया। झलक दिखला जाः सेलेब्स की डांसिंग स्किल्स को दिखाने के लिए ब्रिटिश टीवी शो ‘डांसिंग विद् स्टार’ की शुरुआत हुई। इसे हिन्दी में ‘झलक दिखला जा’ के रूप में पेश किया गया। लेकिन फिर भी कुछ ऐसे रियलिटी शोज हैं जिनके आइडियाज इंडिया में ही जनरेट हुए हैं। इनमें ‘डांस इंडिया डांस’, ‘इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज’, ‘सारेगामापा’, ‘नच बलिए’, ‘कॉमेडी सर्कस’, ‘मिशन उस्ताद’, ‘जो जीता वही उस्ताद’, ‘रोडीज’, ‘जस्ट डांस’, ‘डांस प्लस’ जैसे कई शोज शामिल हैं।

ऐसा नहीं है कि मैं सारे शोज को बेकार मान रही हूं। ढेरों ऐसे शोज जो विदेशों से कॉपीड हैं लेकिन उनके कॉन्सेप्ट को भारत में डिवेलप कर प्रस्तुत किया जाता रहा है। मेरा इस लेख के माध्यम से दो बिंदुओं पर प्रकाश डालना है कि अगर हम स्वदेशीता को अपना रहे हैं तो हम भारतीयता पर आधारित ऐसे कॉन्सेप्ट को क्यों नहीं विकसित कर रहे हैं जो हमारी संस्कृति को और मजबूती प्रदान करे, क्योंकि कहीं न कहीं, वही एक खाली जगह ही है जिसकी पूर्ति विदेशी शोज की कॉपी के तौर पर कर दी जाती है। और दूसरा कि विदेशी शोज की कॉपी कर मनोरंजन की आड़ में कहीं हमारे देश में माहौल खराब करने की कोशिश तो नहीं हो रही ? भारतीय जनता पार्टी की हमेशा से अपनी विचारधारा रही है और मैं सरकार के सामने इस विषय को रखूंगी कि बिग बॉस जैसे शोज के विज्ञापन पर केवल 150 करोड़ तक खर्च कर अपने ही देश के पैसे को अपनी ही संस्कृति को धूमिल करने को योजना रचने का खेल करने वालों पर भी नकेल कसना ज़रूरी है। क्योंकि मनोरंजन वहां तक ही उचित है जहां तक हमारी संस्कृति पर आंच न आए, क्योंकि राष्ट्र सर्वोपरि है।

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अनुश्री मुखर्जी
श्रीमती अनुश्री मुखर्जी, महिला सशक्तीकरण की दिशा में कार्य को लेकर वह नाम हैं, जो पिछले 20 वर्षों से लगातार गैर-सरकारी संगठनों से जुड़कर महिलाओं के अधिकार व प्रशिक्षण को लेकर प्रयासरत रही हैं। श्रीमती मुखर्जी मानती हैं कि देश में महिलाओं को पुरुषों से बराबर कहा तो जाता है, लेकिन आज भी हमारा समाज उस पुरानी मानसिकता में ही जी रहा है, बस शब्द और कहने के मायने बदल गए हैं। महिलाओं को समानता का अधिकार तभी मिल सकता है जब उन्हें बराबर शिक्षा देकर तथा कुशल कामगार बनाकर प्रोत्साहित करेंगे।

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