जल संरक्षण के लिए समाज को जागृत करने का एक सार्थक प्रयास….

water*नवीन सविता

बीते दिनो ड्रीम वैली कॉलेज द्वारा कला वीथिका, ग्वालियर में जल संरक्षण पर चित्रकला का आयोजन किया गया, आयोजन में विद्यार्थियों एवं पेशेवर चित्रकारों ने पेंटिंग के माध्यम से पानी की कमी होने पर क्या स्थिति निर्मित हो सकती है इसको चित्रों के माध्यम से समाज के बीच दर्शाया गया, इस आयोजन में जब जाना हुआ तो चित्र साफ़ – साफ़ संदेश देते हुए बोल रहे थे की यदि जल का संरक्षण नहीं किया गया तो समाज को भयंकर स्थितियों का सामना करना पड़ेगा

प्राय यह देखा जा रहा है जल की उपलब्धता दिनों दिन कम होती जा रही है, और जो उपलब्ध है वो तेजी से दूषित हो रहा है और बहुत से उपयोगकर्ता इसको व्यर्थ बहाने से भी नहीं चूकते है यदि ऐसा ही चलता रहा तो पानी की कमी के कारण एक दिन समाज में गंभीर स्थितियां निर्मित होंगी. विभिन्न क्षेत्रों में पानी के उपयोगकर्ताओं द्वारा मुश्किलों का सामना करते हुए देख कर पर्यावरण प्रेमी जल संरक्षण के लिए निरंतर अलग अलग माध्यमों से संदेश देते हुए दिखाई देते है.

इसी कड़ी में इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ड्रीम वैली कॉलेज के चेयरमैन सिद्धार्थ सचेती जी ने सार्थक प्रयास करते हुए जल संरक्षण के लिए विभिन्न आयोजन जैसे- नुक्कड़ नाटक, पेम्फलेट वितरण एवं चित्रकला प्रदर्शनी के माध्यम से समाज को जागृत करने का प्रयास किया. कला वीथिका में आयोजित चित्रकला प्रदर्शनी में सभी वर्गों के छात्रों एवं पेशेवर चित्रकारों ने सहभागिता की जिसमे चित्रकारों ने चित्र बनाकर जल संरक्षण करने लिए समाज को संदेश दिया और उनको जागरूक करने का प्रयास किया. सिद्धार्थ जी को प्रदर्शनी के आयोजन की प्रेरणा फेसबुक पर एक पोस्ट पढ़ कर मिली जिसमे गिरता पानी का स्तर एवं प्रदूषित होते पानी पर लेखक ने गहन चिंता व्यक्त की थी और जल संरक्षण के लिए एक मार्मिक संदेश दिया था.

“पानी के बिना जीवन जीना नामुमकिन है यह सर्व विदित है. हमको इसे प्रदूषित किये बिना अपने लिए और भविष्य की पीढ़ी केलिए उचित आपूर्ति हेतु हमें पानी को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की सख्त आवश्यकता है.

स्वदेश स्टोरी के माध्यम से तीन चित्रों के द्वारा जो संदेश दिया गया उसको बताना चाहते है.
चीटियाँ…चलो अपन ही जल संरक्षण कर लें

इस चित्र के माध्यम से चित्रकार कृष्णा दीक्षित समाज को बताने की कोशिश कर रहे है की पानी से भरा हुआ गिलास गिर जाता है और पानी फर्श पर फेलने लगता है और न बोलने वाले जीव जैसे सभी घरों में इधर-उधर घुमने वाली चीटियाँ सामूहिक प्रयास करते हुए जल का संरक्षण करते हुए दिखाई दे रही है, यदि बेजुबान जीव इस तरह प्रयास करके यदि जल को संरक्षित कर रहा है तो हम मनुष्य क्यों नहीं ध्यान देते है.

बेजुबान भी पानी के लिए परेशान होता हुआ…

चित्रकार मुकेश कुमार द्वारा बनाया गया चित्र दर्शा रहा है की कैसे एक पक्षी अपनी प्यास बुझाने के लिए नल में अपनी चोंच डाल कर पानी की दो बूँद के लिए तरस रहा है. हमको अपने लिए पानी तो बचाना ही होगा साथ ही इन बेजुवान पक्षियों के बारे में भी सोचना होगा.

सिर्फ एक बूँद ही मिल जाए …..

चित्रकार हेमंत रौजिया चित्र के माध्यम से बताने का प्रयास कर रहे है की कैसे एक बच्चा नल के नीचे अपनी प्यास बुझाने के लिए लटक रहा है, यदि हमने जल को संरक्षित नहीं किया तो हमारी आने वाली पीढ़ी पानी की बूँद-बूँद के लिए तरसेगी.

और..सबसे जरुरी,

मनुष्य एवं जीव जंतुओं को पानी की जितनी आवश्यकता है, उतना ही पेड़ पौधों को भी है. नई पौध को सिंचित करने के लिए निरंतर प्रतिदिन पानी देना होता है यदि इनको पानी नहीं मिला तो ये पौध सुख जायेंगे, यदि सुख गए तो पेड़ नहीं बन पाएंगे… और पेड़ नहीं बने तो अपनी गाडी को छावं में रखने के लिए, राह चलते छांव में खड़े होने एवं बेठने के लिए पेड़ दूर-दूर तक दिखाई नहीं देंगे, चाहे कितना भी वृक्षारोपण कर यदि लेना पानी नहीं मिला तो सुख जायेंगे. वृक्षारोपण के साथ –साथ जल संरक्षण के लिए भी सभी को मिलकर सार्थक प्रयास करते हुए कदम बढाने होंगे.

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